वैशाली के पटेढ़ी बेलसर में बिना काम पोखर की राशि निकासी का आरोप, मनरेगा अधिकारी की भूमिका पर सवाल

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पटेढ़ी बेलसर में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं. सरकारी पोखर के जीर्णोद्धार के नाम पर ₹1.73 लाख की सरकारी राशि का गबन करने का आरोप लगा है. इस मामले में मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है.

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Government Fund Withdrawal: पटेढ़ी बेलसर प्रखंड में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गये हैं. सरकारी पोखर के जीर्णोद्धार के नाम पर धरातल पर काम कराये बिना सरकारी राशि की निकासी किये जाने का आरोप लगाया गया है. मामले में जदयू प्रखंड अध्यक्ष सह प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रेम कुमार निषाद ने मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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सरकारी पोखर के जीर्णोद्धार के नाम पर 1.73 लाख रुपये की निकासी का आरोप

मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी को दिये आवेदन में प्रेम कुमार निषाद ने आरोप लगाया है कि साइन पंचायत के वार्ड संख्या-08 स्थित सरकारी पोखर के जीर्णोद्धार के नाम पर योजना की राशि की निकासी की गयी, जबकि स्थल पर काम नहीं कराया गया.

आवेदन के अनुसार, ग्राम पटेढ़ी स्थित सरकारी पोखर के जीर्णोद्धार के लिए योजना संख्या WH52063 के तहत 1,73,250 रुपये की निकासी की गयी है. आरोप है कि राशि का भुगतान होने के बावजूद धरातल पर कार्य नहीं कराया गया.

मनरेगा की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

मामले ने मनरेगा योजनाओं की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं. जदयू प्रखंड अध्यक्ष ने मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है.

उनका कहना है कि मनरेगा योजना में कार्य की स्वीकृति से लेकर स्थल सत्यापन और भुगतान तक कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था है. ऐसे में यदि बिना कार्य कराये राशि की निकासी हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.

स्थलीय जांच और अभिलेखों की जांच की मांग

प्रेम कुमार निषाद ने दोनों योजनाओं की स्थलीय जांच कराने की मांग की है. इसके साथ ही योजना से संबंधित अभिलेखों, मापी पुस्तिका और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच कराने का अनुरोध किया है.

उन्होंने कहा है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो सरकारी राशि की वसूली के साथ दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने जांच पूरी होने के बाद जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने की भी मांग की है.

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