गोपालगंज: शिक्षक संघ के बैंक खातों को लेकर विवाद गहराया, जाली पदाधिकारियों की सूची देने का आरोप

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बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के खातों को लेकर विवाद गहराया। कोषाध्यक्ष ने फर्जी हस्ताक्षर से राशि निकासी की आशंका जताते हुए बैंक खाते फ्रीज करने की मांग की।

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Gopalganj News : बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के बैंक खातों को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है. संघ के कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बैंक प्रबंधन को पत्र भेजकर दोनों खातों को तत्काल फ्रीज करने की मांग की है. पत्र में कुछ लोगों पर संघ के जाली पदाधिकारियों की सूची बैंक में जमा कराने और कथित फर्जी हस्ताक्षर के जरिये खातों से राशि निकासी का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है.

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निष्कासन के बाद भी पदाधिकारियों के नाम के इस्तेमाल का आरोप

बैंक को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के पत्र के आधार पर छोटे लाल प्रसाद गुप्ता को 26 नवंबर 2024 को प्राथमिक शिक्षक संघ से छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया था. आरोप है कि निष्कासन के बाद भी संघ के पदाधिकारियों के नाम और पद का इस्तेमाल करते हुए बैंक में जाली सूची जमा करायी गयी.

खाते से राशि निकासी की आशंका, बैंक को किया सतर्क

पत्र में यह भी कहा गया है कि कथित जाली सूची और हस्ताक्षर के माध्यम से संघ के बैंक खाते से राशि निकासी की आशंका है. इसे लेकर कोषाध्यक्ष ने बैंक प्रबंधन को सतर्क करते हुए खातों के संचालन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की है.

जांच पूरी होने तक एक रुपये की भी निकासी नहीं करने की मांग

कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बैंक से दोनों खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि जब तक खातों के अधिकृत संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक किसी भी व्यक्ति को खाते से राशि निकालने की अनुमति नहीं दी जाए.

पदाधिकारियों की सूची और हस्ताक्षरों की जांच का आग्रह

बैंक प्रबंधन से खातों से जुड़े दस्तावेज, पदाधिकारियों की सूची और हस्ताक्षरों की जांच कराने का भी आग्रह किया गया है. संघ की ओर से कहा गया है कि जांच पूरी होने के बाद ही अधिकृत पदाधिकारियों को खातों के संचालन की अनुमति दी जाए.

दूसरे पक्ष का पक्ष आने के बाद साफ होगी तस्वीर

बैंक खातों को लेकर उठे इस विवाद के बाद अब सबकी नजर बैंक स्तर पर होने वाली जांच पर है. यदि दस्तावेजों और हस्ताक्षरों में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है. फिलहाल पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. संबंधित दूसरे पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी.

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