गोपालगंज के 68 मौजों के सीएस खतियान गायब, लोगों से मांगी जा रही पुरानी नकल
जिला बंदोबस्त कार्यालय | Prabhat Khabar Network
गोपालगंज जिले के 68 राजस्व गांवों के पुराने खतियान राजस्व अभिलेखागार से गायब या क्षतिग्रस्त हो गए हैं. इससे भूमि स्वामित्व और वास्तविक स्थिति के मिलान में राजस्व प्रशासन को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास अपने गांव के पुराने खतियान या उसकी पक्की नकल है, तो वे उसे अंचल कार्यालय या जिला अभिलेखागार में जमा कराएं ताकि उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा सके.
Land records missing in Gopalganj : गोपालगंज जिले में बड़ी संख्या में राजस्व गांवों के कैडस्ट्रल सर्वे (सीएस) खतियान राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं हैं. करीब 68 मौजों के पुराने सीएस खतियान या तो अनुपलब्ध हैं या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. ऐसे में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने संबंधित मौजों के लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास अपने गांव का पुराना सीएस खतियान या उसकी पक्की नकल उपलब्ध है, तो उसकी प्रति संबंधित अंचल कार्यालय या जिला अभिलेखागार में जमा करें. विभाग इन दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप से सुरक्षित करेगा.
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राजस्व प्रशासन के सामने चुनौती
पुराने राजस्व अभिलेखों के उपलब्ध नहीं होने से जमीन के स्वामित्व और वास्तविक स्थिति के मिलान में परेशानी आ सकती है. सरकार भी पहले यह स्वीकार कर चुकी है कि अंचल कार्यालयों में रखे खतियान, खेसरा और रजिस्टर-2 हमेशा अद्यतन नहीं हो सके हैं. जमीन की खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार और म्यूटेशन के बाद हुए बदलाव कई बार पुराने अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाए. ऐसे में पुराने रिकॉर्ड और जमीन की मौजूदा स्थिति के बीच अंतर राजस्व प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है.
एक सदी पुराने हैं सीएस खतियान
जानकारों के अनुसार बिहार में कैडस्ट्रल सर्वे करीब एक सदी पुराना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर सर्वे का काम हुआ. मुख्य रूप से 1890 के दशक से 1920 के दशक के बीच तैयार किए गए खतियानों में भूखंड का क्षेत्रफल, स्वामित्व, अधिकार और कब्जे से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की गयी थीं. यही वजह है कि आज भी जमीन से जुड़े कई मामलों में सीएस खतियान को महत्वपूर्ण मूल अभिलेख माना जाता है.
बदलाव के बाद कराया गया रिविजनल सर्वे
समय के साथ जमीन के स्वामित्व, बंटवारे और उपयोग में बदलाव होते रहे. इन बदलावों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए बाद में रिविजनल सर्वे कराया गया. हालांकि, रिविजनल सर्वे के बाद भी पुराने सीएस खतियान का महत्व खत्म नहीं हुआ. जमीन से जुड़े विवादों और राजस्व मामलों में पुराने खतियान को आधार दस्तावेज के रूप में देखा जाता है. ऐसे में इन अभिलेखों का सुरक्षित रहना आम लोगों के साथ राजस्व प्रशासन के लिए भी जरूरी है.
इन मौजों के सीएस खतियान उपलब्ध नहीं
जिले के अलग-अलग अंचलों में सीएस खतियान के अनुपलब्ध होने की जानकारी सामने आयी है. इनमें गोपालगंज सदर अंचल के खरगौली, कुचायकोट के बसौनापुर, उचकागांव के असंदापुर और विजयीपुर के सोनबरसा शामिल हैं.
मांझा: भसहीं, ईसापुरदियारा, दियरा ईसापुर, पुरैना, परशुरामपुर, सिपाह खास, विशुनपुरा, छवहीं खास और डोमाहाता.
बरौली: सेमरिया, बलरा, हसनपुर, जोगना, मिर्जापुर, ढिढ़वा, दियार ढिढ़वा, बघवार दियरा, बघवार निजामत, भागर, मझरिया, बटरदेह दियरा, सिसकटिया की तीन प्रविष्टियां और सलेमपुर पूर्बी.
सिधवलिया: टंडसपुर, रामपुरवा, अमरपुरा, मंगरवा खाप, बनजरिया और सलेहपुर.
बैकुंठपुर: दीपू, पखड़ी, पखड़ी खाप, मानटेगराही, घोघराहा, रतेपुर, सतपटिया, सतपटिया कनहवली, बंधौली दियरा, जगदीशपुर, बसंत, धनपरा, पचपंच, बनघट, अहियापुर, अहियापुर दियरा, बीबीपुर, सतरघाट, सिसवन, आशा खैरा दियरा, खिरोधर पट्टी, मोहम्मदपुर दियारा, मोहम्मदपुर निजामत, सनउट, बिलरपुर, मंगलपुर वृत्त, घोघराहा दियरा, ढाब, ढाब निजामत, टिला टोला, महारानी पंडुही, महारानी हथियाही और राणा खाप.
रिकॉर्ड बचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम
राजस्व मामलों के जानकारों के अनुसार सीएस खतियान के उपलब्ध नहीं होने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में संबंधित अभिलेखों के संरक्षण और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया जरूरी है. लोगों के पास उपलब्ध पुरानी नकल या अन्य प्रमाणित प्रति से रिकॉर्ड को दोबारा तैयार करने में मदद मिल सकती है. विभाग की ओर से ऐसे दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की पहल को राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
डीएम बोले- पक्की नकल भी जमा कराएं
जिला अभिलेखागार से खतियान के गायब या अनुपलब्ध होने के मामले में डीएम समीर सौरभ ने बताया कि जिला बंदोबस्त पदाधिकारी के स्तर से इस संबंध में कार्रवाई चल रही है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास संबंधित खतियान की पक्की नकल उपलब्ध है, वे भी उसे जमा करा सकते हैं. उपलब्ध नकल के आधार पर प्रभावित अभिलेखों को तैयार करने में मदद मिलेगी.
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