गोपालगंज में गंडक का जलस्तर फिर बढ़ा, डुमरियाघाट में खतरे के निशान से ऊपर; तटबंधों पर निगरानी तेज
गंडक नदी की तस्वीर.
नेपाल से आई भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर गोपालगंज में खतरे के निशान को पार कर गया है. डुमरियाघाट पर नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटबंधों और दियारा इलाकों में चिंता बढ़ गई है.
Gandak River: नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश और अगस्त में आयी फ्लैश फ्लड के बाद गंडक नदी को लेकर गोपालगंज में लगातार सतर्कता बनी हुई है. 26 अगस्त को नेपाल में फ्लैश फ्लड की स्थिति के मद्देनजर बिहार सरकार ने गंडक से जुड़े जिलों को अलर्ट किया था. गोपालगंज में संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने तटबंधों, नदी किनारे के इलाकों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए थे.
अगस्त में बढ़ा था बाढ़ का खतरा
नेपाल में अचानक बढ़े जलप्रवाह के बाद गंडक नदी में फ्लैश फ्लड की आशंका जतायी गयी थी. उस समय गोपालगंज समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में विशेष सतर्कता बरती गयी. गोपालगंज में एनडीआरएफ की तैनाती की तैयारी की गयी थी, जबकि प्रशासन को निचले इलाकों और तटबंधों की लगातार निगरानी का निर्देश दिया गया था.
26 अगस्त को गंडक के संभावित बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी समीर सौरभ ने मंगलपुर पुल और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण भी किया था. उस समय डुमरियाघाट पर गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी.
जलस्तर घटा तो दियारा के लोगों ने ली राहत की सांस
अगस्त के आखिर में जलस्तर में कमी आने लगी. इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में भी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी रहा. 7 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार गोपालगंज में गंडक खतरे के निशान से महज आठ सेंटीमीटर नीचे थी. नेपाल के कैचमेंट क्षेत्र में 22 एमएम बारिश के बावजूद उस समय निचले इलाकों में तत्काल बड़े बाढ़ खतरे से राहत बनी हुई थी.
9 सितंबर तक गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया था. इससे दियारा क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली, हालांकि प्रशासन ने निगरानी जारी रखी.
15 सितंबर को फिर बढ़ने लगा जलस्तर
सितंबर के मध्य में स्थिति ने फिर करवट ली. 15 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक गोपालगंज में गंडक नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने लगा था. इससे दियारा और तटवर्ती इलाकों में कटाव का खतरा बढ़ा और प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग की इंजीनियरिंग टीमों ने तटबंधों की निगरानी तेज कर दी.
डुमरियाघाट में खतरे के निशान से ऊपर
बिहार जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 18-19 सितंबर के आसपास डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया था. 19 सितंबर के रियल टाइम आंकड़े में डुमरियाघाट का जलस्तर 62.43 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 62.22 मीटर है. यानी नदी करीब 21 सेंटीमीटर ऊपर थी और उस समय जलस्तर स्थिर दर्ज किया गया.
वहीं विशंभरपुर समेत अन्य तटवर्ती इलाकों में भी नदी के उतार-चढ़ाव पर नजर बनी हुई है. ऐसे में दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए तटबंधों और नदी के जलस्तर की निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है.
बाढ़ के साथ नहर व्यवस्था पर भी पड़ा असर
गंडक में बढ़े पानी और गाद का असर सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ा. सितंबर के मध्य में गाद की मात्रा बढ़ने के कारण सारण मुख्य नहर में पानी का प्रवाह रोका गया था. स्थिति में सुधार के बाद करीब 1,000 क्यूसेक पानी फिर से छोड़ा गया, जिससे किसानों को सिंचाई सुविधा बहाल होने लगी.
अभी क्या है स्थिति
19 सितंबर तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गोपालगंज के डुमरियाघाट पर गंडक खतरे के निशान से ऊपर थी और जलस्तर स्थिर दर्ज किया गया था. वहीं 21 सितंबर के लिए उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान में गोपालगंज में गरज के साथ बारिश की संभावना बतायी गयी है. इसलिए नदी किनारे और निचले इलाकों में जलस्तर, कटाव तथा तटबंधों की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है.
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