पूर्व सांसद नगीना राय हत्याकांड: गोपालगंज कोर्ट में बचाव पक्ष की जोरदार बहस, सीआईडी जांच रिपोर्ट और गवाही पर उठाए गंभीर सवाल, अब रोज होगी सुनवाई
सिविल कोर्ट में सुनवाई के बाद निकलते अधिवक्ता.
Former MP Nagina Rai murder case Gopalganj: गोपालगंज में 35 साल पुराने पूर्व सांसद नगीना राय हत्याकांड में बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. बचाव पक्ष ने सीआईडी जांच रिपोर्ट और गवाहों की गवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए. अदालत ने अब मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला किया है.
Former MP Nagina Rai murder case Gopalganj: बिहार सरकार के पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद नगीना राय के 35 वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्याकांड में गोपालगंज के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम संजीव कुमार सिंह की अदालत में बुधवार को सुनवाई हुई. ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल चौबे ने जिरह करते हुए अभियोजन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने दलील दी कि वारदात रात के अंधेरे में हुई थी और किसी चश्मदीद ने हमलावरों को स्पष्ट रूप से नहीं देखा था. हत्याकांड के करीब 10 घंटे बाद केस दर्ज कराया गया और उनके मुवक्किल को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया.
सीआईडी जांच रिपोर्ट और गवाही पर उठाए सवाल
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जांच प्रक्रिया की कानूनी कमियों को अदालत के समक्ष प्रमुखता से रखा:
- जांच रिपोर्ट न मिलने का आरोप: अधिवक्ता ने दलील दी कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की सीआईडी (CID) जांच कराई गई थी, जिसमें आरोपियों को संलिप्त नहीं पाया गया था. इसके बावजूद स्थानीय अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उन्हें सीआईडी जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि उपलब्ध नहीं कराई गई.
- जांच अधिकारी की गवाही नहीं: अभियोजन पक्ष सीआईडी के जांच अधिकारी को गवाही के लिए कोर्ट में प्रस्तुत करने में विफल रहा, जिसके चलते यह महत्वपूर्ण मुकदमा पिछले एक दशक से अधिक समय तक लंबित रहा.
- रोजाना सुनवाई का फैसला: अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में दैनिक आधार पर सुनवाई का निर्णय लिया और अगली बहस के लिए गुरुवार की तिथि मुकर्रर की.
गायब हुए रिकॉर्ड के बाद 'रिकंस्ट्रक्ट' कर शुरू हुआ ट्रायल
यह ऐतिहासिक मुकदमा कई वर्षों तक अदालती रिकॉर्ड के अभाव में अटका रहा था:
- रिकॉर्ड पुनर्गठन: मामले का मूल रिकॉर्ड न्यायालय अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं था. इसके बाद अभियोजन पक्ष के विशेष अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी की अपील पर अदालत ने पक्की नकल, एफआईआर, चार्जशीट, पूर्व दर्ज बयान और गवाहियों के साक्ष्यों के आधार पर केस को विधिवत 'रिकंस्ट्रक्ट' (पुनर्गठित) किया.
- शीघ्र फैसले की उम्मीद: पिछले 35 वर्षों से लंबित इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने उपलब्ध सुबूतों पर त्वरित ट्रायल शुरू किया है, जिससे अब जल्द फैसले की उम्मीद जगी है.

10 अप्रैल 1991 को भोपतिपुर में हुई थी सरेआम हत्या
कुचायकोट थाने में दर्ज कांड संख्या 40/1991 के अनुसार यह सनसनीखेज वारदात तीन दशक पहले घटित हुई थी.
"सूचक ओमप्रकाश राय के बयान के अनुसार 10 अप्रैल 1991 की शाम करीब छह बजे पूर्व सांसद नगीना राय पटना से गोपालगंज लौटे थे. कुचायकोट थाना क्षेत्र के भोपतिपुर गांव के पास गन्ने से लदी बैलगाड़ी के कारण सड़क पर जाम था, जिससे उनकी जीप रुक गई. इसी दौरान सात-आठ अज्ञात हमलावरों ने उनकी जीप को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी. शरीर में दो गोलियां लगने से वह लहूलुहान हो गए और सदर अस्पताल ले जाने के क्रम में उन्होंने दम तोड़ दिया." — केस रिकॉर्ड एवं दर्ज प्राथमिकी, कुचायकोट थाना
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