तीन दशक बाद 14 दिनों का पितृपक्ष
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Sep 2016 1:29 AM (IST)
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गोपालगंज : पितृपक्ष इस माह के कृष्ण पक्ष में पितरों के निर्मित तर्पण. हिंदी के बारहों मासो में आश्विन मास का अपना विशिष्ट स्थान है. 27 नक्षत्रों में प्रमुख व प्रथम नक्षत्र अश्विन के नाम पर इसका नाम आश्विन पड़ा. इस बार इस मास में तिथि के क्रम में क्षय व वृद्धि दोनों का ही […]
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गोपालगंज : पितृपक्ष इस माह के कृष्ण पक्ष में पितरों के निर्मित तर्पण. हिंदी के बारहों मासो में आश्विन मास का अपना विशिष्ट स्थान है. 27 नक्षत्रों में प्रमुख व प्रथम नक्षत्र अश्विन के नाम पर इसका नाम आश्विन पड़ा. इस बार इस मास में तिथि के क्रम में क्षय व वृद्धि दोनों का ही योग बनेगा.
इस वजह से पितृपक्ष 14 दिनों का होगा. आचार्य शंभु नाथ मिश्र के अनुसार इस बार पितृपक्ष 17 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा, जबकि पंचमी व पष्ठी का श्राद्ध 21 सितंबर को किया जायेगा. सब मिला कर देखा जाये तो 30 तिथियों का एक मास आश्विन पूरा रहेगा. अंतर बस यह है कि आश्विन कृष्ण पक्ष में नवमी के क्षय से 14 दिन का, जबकि शुक्ल पक्ष में द्वितीया की वृद्धि से 16 दिन का होगा. शास्त्र के अनुसार सूर्योदय के बाद किसी तिथि का शुरू हो और दूसरे सूर्योंदय के पहले उसका अंत हो जाये तो उसे क्षय तिथि कहते हैं.
पितृपक्ष में तिथियों की चाल
श्राद्ध दिन तारीख
प्रतिपदा शनिवार 17 सितंबर
द्वितीया रविवार 18 सितंबर
तृतीया सोमवार 19 सितंबर
चतुर्थी मंगलवार 20 सितंबर
पंचमी-षष्ठी बुधवार 21 सितंबर
सप्तमी गुरुवार 22 सितंबर
पितृपक्ष में अपने परिजनों को एहसास कराते हैं पितर
भारतीय शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि पितृगण पितृपक्ष में पृथ्वी पर आते हैं और 16 दिनों तक पृथ्वी पर रहने के बाद अपने लोक लौट जाते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि पितृपक्ष के दौरान पितृगण अपने परिजनों के आसपास रहते हैं. इसलिए इन दिनों में कोई भी ऐसा काम नहीं करें, जिससे पितृगण नाराज हो. पितरों को खुश रखने के लिए पितृपक्ष में कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए. पितृपक्ष के दौरान जामाता(दामाद), भांजा व गुरु को भोजन कराना चाहिए. इससे पितृगण अत्यंत प्रसन्न होते हैं. भोजन करवाते समय भोजन का पात्र दोनों हाथों से पकड़ कर लाना चाहिए, अन्यथा भोजन का अंश राक्षस ग्रहण कर लेते हैं. इससे ब्राह्मणों द्वारा अन्न ग्रहण करने के बावजूद पितृगण भोजन का अंश ग्रहण नहीं करते. इधर, पितृपक्ष को लेकर गया आदि स्थलों पर जानेवाले कई लोग होटल व धर्मशाला की बुकिंग में लग गये हैं.
इस बार कृष्ण पक्ष में एक तिथि के क्षय से पंचमी व षष्ठी का श्राद्ध 21 को
शुक्ल पक्ष में एक तिथि की वृद्धि से द्वितीय का मान दो दिनों में
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