भुखमरी से जूझते परिवार का अस्पताल सहारा

Published at :23 Feb 2016 8:10 AM (IST)
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भुखमरी से जूझते परिवार का अस्पताल सहारा

गोपालगंज : सदर अस्पताल का पुरुष वार्ड. बेड पर पड़े 70 साल के बुजुर्ग बाबू लाल राम जीवन के अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं. शरीर ने जबतक साथ दिया, तबतक बेटी और उसके दो बेटों का भरण-पोषण किया. अब बीमार होने पर परिवार भुखमरी से जूझने लगा है. पेट पालने के लिए बुजुर्ग पिता […]

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गोपालगंज : सदर अस्पताल का पुरुष वार्ड. बेड पर पड़े 70 साल के बुजुर्ग बाबू लाल राम जीवन के अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं. शरीर ने जबतक साथ दिया, तबतक बेटी और उसके दो बेटों का भरण-पोषण किया. अब बीमार होने पर परिवार भुखमरी से जूझने लगा है.
पेट पालने के लिए बुजुर्ग पिता के साथ अस्पताल में मासूम बच्चों के साथ जिंदगी गुजार रही है बेटी. उधर, अस्पताल प्रशासन ने पीड़ित परिवार को डिस्चार्ज कर वार्ड खाली करने का फरमान जारी कर दिया है. बीमार बुजुर्ग की बेटी संकेशिया देवी खुद मोतियाबिंद से ग्रसित है.
उसे कुछ दिखायी नहीं देता. वह अस्पताल नहीं छोड़ रही है. महिला ने बताया कि मायके और ससुराल में उसका कोई नहीं है. बीमार पिता को इस हाल में कहां लेकर जायेंगे. यहां तो उसे दो वक्त की रोटी मिल जा रही है. महिला ने कहा कि बीमार पिता की मौत हो जाने पर बच्चों को लेकर कहीं भी रह लेंगे. दोपहर में अस्पताल से मिले भोजन को खुद न खाकर अपने मासूम बेटे सूरज व नीरज कुमार को खिला रही थी.
छह जनवरी को लायी थी अस्पताल :
नगर थाने के अरार गांव के रहनेवाले बाबू लाल राम को उनकी बेटी ने छह जनवरी को बीमार होने पर सदर अस्पताल में भरती कराया था. पति के छोड़ कर जाने के बाद से वह मायके में ही रहती थी. अस्पताल में पिता के साथ बच्चों को लेकर रहने लगी. गत 15 जनवरी को महिला से खिड़की का शीशा टूट गया. इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उसी दिन बुजुर्ग को डिस्चार्ज कर वार्ड खाली करने की परची थमा दी.
मोतियाबिंद से ग्रसित है महिला :
मासूम बच्चों के साथ पिता की देखरेख के लिए अस्पताल में जिंदगी काट रही संकेशिया देवी मोतियाबिंद से ग्रसित है.
उसकी दोनों आंख से कुछ दिखायी नहीं देता. वह पिता और अपने बच्चों की देखभाल कर रही है. महिला ने बताया कि भुखमरी के कारण अस्पताल नहीं छोड़ रहे हैं. अस्पताल में आंख बनवाने के लिए कई अधिकारियों से गुहार लगायी. लेकिन, किसी ने उसकी फरियाद नहीं सुनी. अब अस्पताल से निकलने का आदेश मिलने से वह संकट में है.
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