मगध विवि सीनेट में शिक्षक-कर्मचारी-छात्र प्रतिनिधित्व शून्य, शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति
मगध यूनिवर्सिटी की तस्वीर
मगध विश्वविद्यालय सीनेट की बैठक से पहले शिक्षक, कर्मचारी और छात्र प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व शून्य होने पर शिक्षक संघ ने आपत्ति जताई है. संघ ने वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है.
मगध विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली सीनेट की बैठक को लेकर मगध विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर शिक्षक संघ ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए सीनेट की वर्तमान संरचना पर महत्वपूर्ण वैधानिक एवं लोकतांत्रिक सवाल उठाए हैं.
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संघ के अध्यक्ष डॉ. अनुज कुमार तरुण ने कहा कि सीनेट विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण वैधानिक एवं प्रतिनिधिक संस्था है, जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न हितधारकों की सहभागिता सुनिश्चित करने का उद्देश्य निहित है.
प्रतिनिधित्व शून्य होने और वैधानिक प्रावधानों पर सवाल
लेकिन, विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सीनेट सदस्य सूची में शिक्षक प्रतिनिधि, कर्मचारी प्रतिनिधि और छात्र प्रतिनिधि की संख्या शून्य दर्शाई गई है. इतना ही नहीं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग का प्रतिनिधित्व भी शून्य है.
उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं, बल्कि सीनेट की संरचना में निर्धारित वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है, जब सीनेट विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है, तब उसमें शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों की प्रतिनिधिक आवाज का अभाव चिंताजनक है.
आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा
डॉ. तरुण ने कहा कि संघ ने शिक्षक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लगभग एक सप्ताह पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष विधिवत आवेदन देकर शिक्षक प्रतिनिधि को सीनेट में शामिल किए जाने की मांग की थी, लेकिन अब तक उस आवेदन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. यह स्थिति और भी दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि सीनेट की बैठक शनिवार को ही है.
विधानसभा सदस्यों के निर्वाचन की स्थिति पर असमंजस
संघ ने यह भी सवाल उठाया कि बिहार विधानसभा के वर्तमान सदस्यों के निर्वाचन को पर्याप्त समय बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूची में निर्वाचित विधानसभा सदस्यों के प्रतिनिधित्व की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है. विश्वविद्यालय प्रशासन को यह बताना चाहिए कि संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक निर्वाचन या मनोनयन की प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं की गई है.
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विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक भावना की रक्षा
संघ का स्पष्ट मत है कि सीनेट महज एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक सहभागिता और वैधानिक निर्णय प्रक्रिया की महत्वपूर्ण संस्था है. डॉ. अनुज कुमार तरुण ने कहा कि संघ का विरोध किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक सहभागिता, प्रतिनिधित्व और वैधानिक प्रक्रिया की रक्षा का सवाल है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
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