गया जी : मगध मेडिकल में पहले जांच के लिए लंबी कतार, फिर डॉक्टर नहीं मिलते; मरीज हो रहे परेशान
इलाज के लिए ओपीडी में पहुंचे मरीज व परिजन | Prabhat Khabar Network
मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में इलाज के बजाय मरीजों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है. लंबी लाइनों और लचर व्यवस्था के कारण सुदूर ग्रामीण इलाकों से आए मरीज बिना इलाज के ही लौट रहे हैं. जांच रिपोर्ट आने तक डॉक्टर का समय समाप्त हो जाता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया टूट जाती है.
Gaya Ji News : अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों को समुचित इलाज के बजाय भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है. पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और पैथोलॉजी जांच कराने तक लंबी लाइनों तथा लचर व्यवस्था के कारण सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज बिना इलाज के ही लौटने को विवश हैं. स्थिति यह है कि जांच रिपोर्ट हाथ में आने तक संबंधित डॉक्टर का ओपीडी समय समाप्त हो जाता है और अगले दिन नई यूनिट तैनात होने के कारण इलाज की पूरी कड़ी बीच में ही टूट जाती है.
अस्पताल में ओपीडी का आधिकारिक समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे और शाम तीन से पांच बजे तक निर्धारित है. हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि दोपहर एक बजे के बाद ही ओपीडी से सीनियर डॉक्टर उठ जाते हैं.
मरीज को पर्ची बनवाने और डॉक्टर से मिलने के बाद जांच कराने में ही दो से तीन घंटे का लंबा समय लग जाता है, जिसके कारण रिपोर्ट आने तक ओपीडी बंद हो चुका होता है.
अस्पताल में जांच प्रक्रिया बेहद जटिल और थकाऊ
अस्पताल के भीतर मरीजों के लिए जांच प्रक्रिया बेहद जटिल और थकाऊ बनी हुई है. मरीजों को कुछ विशेष जांचों के लिए पुरानी बिल्डिंग तो कुछ अन्य जांचों के लिए मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़ते हैं. अस्पताल प्रशासन द्वारा किए जा रहे 'सेंट्रलाइज्ड पैथोलॉजी' के तमाम दावे अब तक केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं.
वहीं, अल्ट्रासाउंड विभाग की स्थिति सबसे अधिक बदतर है. केंद्र पर केवल एक ही डॉक्टर की तैनाती होने के कारण यहां मुख्य रूप से पुलिस केस (मेडिको लीगल) से जुड़े मामलों के ही अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं, जिसके चलते आम मरीजों को मजबूरन बाहर के निजी सेंटर्स पर मनमाना पैसा देकर अपनी जांच करवानी पड़ रही है.
कर्ज लेकर इलाज कराने को मजबूर हैं गरीब मरीज
स्वास्थ्य व्यवस्था की इस लेटलतीफी और लचर कार्यशैली का सीधा खामियाजा दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण और गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. डुमरिया से इलाज कराने आए रामसेवक प्रसाद ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनका पूरा एक दिन केवल जांच कराने में ही बीत गया, और अब अगले दिन शहर में रुकने या दोबारा आने के लिए उन्हें कर्ज लेने की मजबूरी है.
वहीं, औरंगाबाद के अंबा क्षेत्र से आए सुरेश सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें उसी डॉक्टर से दोबारा दिखाने के लिए तीन दिन बाद यानी संबंधित यूनिट के अगले टर्न पर आने को कह दिया गया है.
अस्पताल उपाधीक्षक ने दिया व्यवस्था में सुधार का आश्वासन
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अस्पताल उपाधीक्षक डॉ प्रवीण कुमार अग्रवाल ने माना कि जांच के बाद मरीजों को बेवजह अगली तारीख पर बुलाना पूरी तरह गलत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्यतः केवल गंभीर ऑपरेशन वाले मरीजों को ही संबंधित यूनिट के डॉक्टर से दोबारा दिखाने की सलाह दी जाती है.
Also Read : विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला को लेकर गया जंक्शन का डीएम ने किया निरीक्षण, यात्री सुविधाओं की समीक्षा
इसके साथ ही उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों को आश्वस्त किया है कि अस्पताल प्रशासन मौजूदा व्यवस्था को जल्द से जल्द सुधारने की दिशा में पूरी गंभीरता से काम कर रहा है, ताकि भविष्य में मरीजों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए