गया जी : जमीन में क्यों दबाया जा रहा मगध मेडिकल हॉस्पिटल का कचरा? पानी खराब होने का आरोप
जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के पीछे खुले में फेंका गया हॉस्पिटल का कचरा | Prabhat Khabar Network
मगध मेडिकल अस्पताल परिसर में कचरा निस्तारण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है. मेडिकल और सामान्य कचरे को जमीन में गड्ढा खोदकर दबाया जा रहा है, जिससे भूजल और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं.
Medical Waste Dumping Gaya : मगध मेडिकल अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए उपयोग किए जाने वाले परिसर के आसपास भी मेडिकल व सामान्य कचरे के निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि कचरे को निस्तारण के लिए भेजने के बजाय कई जगहों पर गड्ढा खोदकर जमीन में दबाया जा रहा है. बताया गया कि यह काम पिछले कई महीनों से किया जा रहा है.
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जेसीबी ड्राइवर के अनुसार, वह अब तक 10 से अधिक जगहों पर गड्ढा खोदकर कचरा डाल चुका है. इसके लिए उसे भुगतान किया जाता है. हालांकि, कुछ जगहों से मेडिकल वेस्ट मिला कचरा सिनर्जी प्लांट भी भेजा जा रहा है. बताया गया कि वहां पहुंचने वाले कचरे की मात्रा अस्पताल से रोज निकलने वाले कुल कचरे की करीब आधी है.
डॉक्टरों ने बताया कि किसी भी हालत में मेडिकल वेस्टेज को जमीन में दबाने का काम नहीं किया जा सकता है. स्थानीय जनप्रतिनिधि का आरोप है कि मेडिकल वेस्टेज नीचे दबाने के बाद आसपास का वाटर लेयर प्रदूषित हो रहा है.

कुछ दिनों तक कुछ डस्टबिन में मेडिकल वेस्टेज रखे जाते थे. उस वक्त इनका कचरा भी निस्तारण के लिए जाता था. लेकिन, अब यह काम पूरी तौर से बंद कर दिया गया है. दोनों ही कचरा एक ही डस्टबिन में रख दिया जाता है.
इसके बाद यह कचरा निगम ने लेना बंद कर दिया है. सिनर्जी प्लांट की मशीन भी कई बार मिक्स कचरा के चलते खराब हो चुकी है.
प्लांट के स्थानीय प्रतिनिधि ने बताया कि मेडिकल से मेडिकल वेस्ट व सामान्य कचरा दोनों एक साथ ही आ रहा है. जितना कचरा यहां आता है उसे नष्ट कर दिया जाता है.
जमीन के अंदर मेडिकल वेस्ट दबाने से हर स्तर पर नुकसान
नियमों के अनुसार, जमीन में गहरे गड्ढे करके कचरा दबाने के लिए अंडरग्राउंड वाटर लेयर को प्रदूषित होने का खतरा हर वक्त बना रहता है. इस तरह के काम से बारिश या नमी के कारण जहरीले रसायन और संक्रमण फैलाने वाले तत्व रिसकर अंडरग्राउंड में मिल जाते हैं, जिससे पीने का पानी दूषित हो जाता है.
एक्सपायर्ड दवाइयां, केमिकल्स व भारी धातुएं मिट्टी में मिलकर उसकी उर्वरता नष्ट कर देती हैं. यह जहरीले तत्व खाद्य श्रृंखला के जरिए फसलों और इंसानों तक पहुंच सकते हैं.
उपयोग की गयी सीरिंज, सुई, खून से सनी पट्टियां और संक्रमित कचरा जमीन के अंदर पूरी तरह नष्ट नहीं होने पर बैक्टीरिया, वायरस (जैसे हेपेटाइटिस बी, एचआइवी) और अन्य रोगाणुओं को बढ़ावा देते हैं. आवारा मवेशी या कचरा बीनने वाले लोग जब ऐसे अनधिकृत डंपिंग स्थलों के संपर्क में आते हैं, तो वे गंभीर चर्म रोग और जानलेवा संक्रमणों का शिकार हो जाते हैं.
एनजीटी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जता चुकी है चिंता
मेडिकल वेस्ट ( बायोमेडिकल कचरा ) को जमीन के अंदर दबाने या खुले में फेंकने का कोई प्रावधान नहीं है. यह काम पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है. हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एनजीटी ) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ( सीपीसीबी ) की रिपोर्ट में कई जगहों के मेडिकल कचरा के निस्तारण की प्रक्रिया पर गहरी चिंता जतायी है.
नगर निगम के सहायक लोक स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार ने बताया कि निगम की ओर से मेडिकल वेस्टेज का निस्तारण के लिए नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि उनके कचरे में ही मेडिकल वेस्टेज मिला हुआ रहता है.

उन्होंने कहा कि मेडिकल वेस्टेज के निस्तारण के लिए अलग से प्लांट का निर्माण अस्पताल परिसर में ही किया गया है और मेडिकल वेस्टेज हर हाल में उक्त प्लांट में ही देना है. नियम है कि निगम के कचरे में अगर मेडिकल वेस्टेज मिला हुआ रहता है, तो पांच लाख तक फाइन किया जायेगा.
सभी को गंदगी के लिए उनका ही वार्ड मिला
स्थानीय पार्षद रणधीर कुमार गौतम ने बताया कि मगध मेडिकल अस्पताल की ओर से कचरा को गड्ढा खुदाई कर जमीन में गाड़ने की सूचना उनके पास आयी है. इसके चलते आसपास के इलाके का अंडरग्राउंड वाटर लेयर प्रदूषित होते जा रहा है.

बड़ा वार्ड होने के चलते यहां पर अब तक पैसे के अभाव में ढंग से विकास के काम के लिए निगम में हर दिन चिकचिक हो रहा है. पहले से अस्पताल परिसर में बने सिनर्जी वेस्ट प्लांट से लोग परेशान थे और अब दूसरा परेशानी यहां के अस्पताल की ओर से लोगों को गंभीर बीमारी से ग्रसित होने का काम किया जा रहा है.
उन्होंने मांग की कि इस तरह के काम पर जांच कर वहां के अधिकारी व जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सके.

क्या कहते हैं उपाधीक्षक
मामले पर मगध मेडिकल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस तरह के काम का आदेश अस्पताल प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया है. अगर इस तरह का कोई काम एजेंसी करती है, तो उस पर कार्रवाई की जायेगी.
उन्होंने कहा कि इस तरह के काम से प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है और इस पर हर हाल में रोक लगायी जायेगी. उपाधीक्षक ने स्पष्ट किया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से सफाई व कचरा हटाने की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी गयी है और कचरा उठाना व उसका निस्तारण के लिए भेजना उसी एजेंसी का काम है.
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