Gaya News. गया जी शहर के एक चौराहे का नाम यूं ही नहीं पड़ा ‘गोलपत्थर’, यहां लगा था 16 फुट का खंभा

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Gaya News. गया जी शहर के एक चौराहे का नाम यूं ही नहीं पड़ा ‘गोलपत्थर’, यहां लगा था 16 फुट का खंभा

गया जी शहर का गोलपत्थर चौराहा.

Gaya News. गया जी शहर के मुख्य मार्ग जीबी रोड और टिकारी रोड के कॉर्नर पर स्थित गोल पत्थर चौराहा इसका प्रमुख उदाहरण है. यहां भले ही अब गोल पत्थर मौजूद नहीं है, लेकिन इसका नाम और इतिहास आज भी लोगों के जेहन में बसा हुआ है.

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Gaya News. (गया जी से नीरज कुमार की रिपोर्ट). दुनिया की अति प्राचीन नगरी गया जी पुरातन काल से ही धरोहरों से भरी-पूरी पड़ी है. धार्मिक, आध्यात्मिक व पौराणिक नगरी गया जी में भगवान विष्णु के चरण विष्णुपद मंदिर के गर्भ गृह में प्रथम सतयुग काल से स्थित हैं. त्रेता युग में भगवान श्रीराम, द्वापर युग में भीम समेत कई अन्य देवी-देवताओं व महापुरुषों के गया जी आगमन के प्रमाण आज भी मौजूद हैं. टिकारी राजघराने की नृत्यांगना और बॉलीवुड के विख्यात सिने स्टार संजय दत्त की नानी जद्दन बाई का पौराणिक किला तथा ब्रिटिश काल में निर्मित ग्रियेशन कूप समेत कई ऐसे धरोहर यहां आज भी विद्यमान हैं, जो गया जी के अति प्राचीन होने का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं. शहर के कई ऐसे मुहल्ले व चौराहे हैं, जिनका पुरातन इतिहास रहा है. गया जी शहर के मुख्य मार्ग जीबी रोड और टिकारी रोड के कॉर्नर पर स्थित गोल पत्थर चौराहा इसका प्रमुख उदाहरण है. यहां भले ही अब गोल पत्थर मौजूद नहीं है, लेकिन इसका नाम और इतिहास आज भी लोगों के जेहन में बसा हुआ है.

गोल पत्थर चौराहे का ऐतिहासिक महत्व

गया जिला गजेटियर इस बात का प्रमाण है कि गोल पत्थर चौराहे पर वर्ष 1789 में तत्कालीन शासनकर्ता की ओर से 16 फुट से अधिक ऊंचा बलुआ पत्थर का एक खंभा लगाया गया था, जिस पर फारसी भाषा में लेख अंकित था. इस खंभे को नीलांजन नदी के दाहिने किनारे स्थित बोधगया के बकरौर गांव से लाया गया था. अशोक स्तंभनुमा इस खंभे के कारण ही इस चौराहे का नाम गोल पत्थर पड़ा. वर्ष 1970 के आसपास इस खंभे का अस्तित्व समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद भी चौराहे का नाम गोल पत्थर ही प्रचलित रहा.

वर्ष 1970 के आसपास मिटा खंभे का अस्तित्व

वर्ष 1970 के दशक में इस खंभे के पूरी तरह विलुप्त होने की चर्चा तत्कालीन महंथ बजरंग दास की ओर से की जाती थी. महंथ जी के अनुसार यह खंभा अत्यंत विशाल और आकर्षक था, जो सामान्य व्यक्ति की ऊंचाई से कई गुना अधिक था. किसी वाहन की टक्कर से यह खंभा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद प्रशासन की ओर से इसे सड़क किनारे रख दिया गया और बाद में यह धीरे-धीरे विलुप्त हो गया. कहा जाता है कि इसकी खोजबीन भी नहीं की गयी. आज उस ऐतिहासिक पत्थर का कोई निशान नहीं है, लेकिन गोल पत्थर चौराहे का अस्तित्व आज भी जीवित है और इतिहास की गवाही देता है.

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