''जयशंकर प्रसाद छायावाद के स्तंभ ही नहीं, प्रवर्तक भी थे''
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :30 Jan 2017 9:13 AM
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जयंती समारोह में बोले वक्ता गया : जयशंकर प्रसाद छायावाद के एक प्रमुख स्तंभ ही नहीं, बल्कि बड़े प्रवर्तक थे. उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं करने के बाद भी उन्होंने गुरुओं के संगत से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कर 48 वर्ष की उम्र में ही कई रचनाएं अपने नाम कीं. उक्त बातें रविवार को महाबोधि विद्यालय में आयोजित […]
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जयंती समारोह में बोले वक्ता
गया : जयशंकर प्रसाद छायावाद के एक प्रमुख स्तंभ ही नहीं, बल्कि बड़े प्रवर्तक थे. उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं करने के बाद भी उन्होंने गुरुओं के संगत से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कर 48 वर्ष की उम्र में ही कई रचनाएं अपने नाम कीं. उक्त बातें रविवार को महाबोधि विद्यालय में आयोजित जयशंकर प्रसाद के जयंती समारोह में वक्ताओं ने कही. डॉ राम सिंहासन सिंह ने कहा कि जयशंकर प्रसाद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से काव्य जगत को नयी दिशा दिखाई.
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ सच्चिदानंद प्रेमी ने कहा कि श्री प्रसाद ने अपनी रचानाओं के माध्यम से गौरवपूर्ण पक्ष का उद्घाटन किया. श्री प्रसाद ने कभी भी साहित्य को व्यवसाय का केंद्र नहीं बनने दिया. काव्य पाठ करते हुए कुमार कांत ने ‘सोया रहा पहरूआ, चाहे जितना शोर मचाया, बना सेंधमारी के दरवाजे से चोर समाया’ रचना पढ़ी
इस मौके पर राजीव रंजन ने अपनी कविता ‘मेरा घर’ का पाठ किया. गजेंद्र लाल धीरज ने काव्य पाठ करते हुए ‘चांदनी खिली रहे समग्र सृष्टि रात में, सादगी बनी रहे हर प्रणय की बात में’ कहा. इस मौके पर नंदकिशोर सिंह, सुरेंद्र पांडेय सौरभ,बाल कवि पीयुष, सुरेश कुमार, अशोक सिन्हा, सुशील कुमार व अब्दुल मन्नान अंसारी आदि ने अपनी रचनाएं पढ़ीं.
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