वैशाली में स्थापित होगा बुद्ध का अस्थिकलश
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :14 Jan 2017 11:58 PM
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कालचक्र पूजा. बोधगया में बोले मुख्यमंत्री बोधगया : बोधगया के कालचक्र मैदान में आयोजित 34वीं कालचक्र पूजा के समापन समारोह में सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि भगवान बुद्ध के अस्थिकलश को फिर से वैशाली में स्थापित किया जायेगा. इसके लिए वैशाली में स्तूप का निर्माण होगा व बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय भी बनाया जायेगा. […]
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कालचक्र पूजा. बोधगया में बोले मुख्यमंत्री
बोधगया : बोधगया के कालचक्र मैदान में आयोजित 34वीं कालचक्र पूजा के समापन समारोह में सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि भगवान बुद्ध के अस्थिकलश को फिर से वैशाली में स्थापित किया जायेगा. इसके लिए वैशाली में स्तूप का निर्माण होगा व बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय भी बनाया जायेगा. शनिवार को यहां दलाई लामा व विभिन्न देशों के हजारों श्रद्धालुओं के समक्ष सीएम ने कहा कि बुद्ध की अस्थि वैशाली से प्राप्त हुई थी व फिलहाल उसे पटना के संग्रहालय में रखा गया है. सीएम ने कहा कि वैशाली वह स्थान है, जहां बुद्ध ने पहली बार संघ में महिलाओं को प्रवेश दिया था.
दलाई लामा ने भी की शराबबंदी की सराहना. समापन समारोह पर सीएम ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों को बुद्ध स्थली के रूप में गिनाते हुए कहा कि हम बिहारवासी तो पहले से ही पंचशील का अनुसरण करने में लगे हैं. यहां
वैशाली में स्थापित होगा…
के लोगों के मन में बौद्ध धर्म के प्रति श्रद्धा का भाव निहित है. इसी का फलाफल है कि विगत एक अप्रैल से सूबे में शराबबंदी लागू कर दी गयी है. अब पूर्ण नशामुक्ति की ओर कदम बढ़ानेवाले हैं. कालचक्र पूजा में प्रवचन के दौरान दलाई लामा द्वारा शराब का सेवन नहीं करने व बिहार में शराबबंदी की सराहना किये जाने को सीएम ने कहा कि उनकी सराहना के बाद हमें प्रोत्साहन व बल मिला है. उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह व महात्मा गांधी ने भी मादक पदार्थों से परहेज करने की वकालत की थी.
शराबबंदी के बाद अब पूर्ण नशामुक्ति
की ओर बढ़ायेंगे कदम
फिर आयोजित करें कालचक्र पूजा
सीएम ने दलाई लामा के नेतृत्व में आयोजित कालचक्र पूजा को विश्व बंधुत्व, विश्व कल्याण व विश्व शांति के निमित्त होने के साथ ही जातीय, क्षेत्रीय व भाषायी भेद-भाव को भुला कर विभिन्न देशों के लाखों श्रद्धालुओं को एक साथ शामिल होने का बेहतरीन आयोजन बताया. उन्होंने कहा कि इसमें अमीर-गरीब सभी लोग शामिल होते हैं व ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म हो जाता है. इस कारण दलाई लामा से निवेदन है कि बोधगया में ही अगली कालचक्र पूजा का आयोजन कराएं. सीएम ने हवाला दिया कि दलाई लामा के नेतृत्व में अब तक 34 कालचक्र पूजा का आयोजन हो चुका है. तिब्बत में दो, विदेशों में 12, भारत में 19 व बोधगया में पांच मर्तबा कालचक्र पूजा हुई है.
पटना व अन्य स्थलों का भ्रमण करने की अपील
सीएम ने कालचक्र पूजा में शरीक होने को सौभाग्यशाली बताया व कहा कि बुद्ध के 2550 वें महापरिनिर्वाण की स्मृति में पटना में बुद्ध स्मृति पार्क व स्तूप का निर्माण कराया गया था. उसका उद्घाटन भी दलाई लामा ने ही किया था. इसी तरह भगवान बुद्ध ने भी राजगीर के गिद्धकुट पर्वत पर प्रवचन दिया था. सीएम ने कहा कि बिहार में बोधगया, नालंदा, राजगीर, पाटलिपुत्र (पटना), वैशाली व केसरिया सहित अनेक स्थान बौद्ध धर्म के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं. हम सभी बौद्ध स्थलों के विकास करने में जुटे हैं. इस कारण बोधगया आनेवाले श्रद्धालु उक्त स्थलों का भी भ्रमण करें. बोधगया में हर वर्ष बुद्ध महोत्सव का आयोजन किया जाता है. एक फरवरी Â बाकी पेज 17 पर
पटना व अन्य स्थलों…
से महोत्सव शुरू होने वाला है. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों पटना में गुरु गोबिंद सिंह का 350वां प्रकाशोत्सव मनाया गया और कालचक्र के साथ ही महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष पूरे होने पर भी आयोजन किया जा रहा है. सीएम ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को कालचक्र पूजा में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया व कहा कि व्यवस्था में कमी रह गयी होगी, तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं. सीएम के हर संबोधन के बाद कालचक्र मैदान में श्रद्धालुओं द्वारा तालियां बजायी गयीं. इस दौरान सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के प्रधानमंत्री लोपसांग सांग्ये, हाॅलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे व अंत में दलाई लामा ने भी अपने संबोधन में कालचक्र पूजा को लेकर की गयी व्यवस्था के लिए सीएम व प्रशासनिक पदाधिकारियों का आभार जताया. कालचक्र के समापन समारोह में शामिल होने से पहले सीएम ने महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की.
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