एक करोड़ 42 लाख रुपये होंगे खर्च

गया: वाटर प्रोजेक्ट के पूरा करने में बरती गयी लापरवाही के कारण पिछले आठ सालों से कई मुहल्ले के लोगों को साल में पांच माह पेयजल नहीं मिल पाता है. इस समस्या के समाधान के लिए पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (पीएचइडी) ने सत्येंद्र कुमार यादवेंदु को एक करोड़ 42 लाख रुपये से किर्लोस्कर द्वारा […]
वर्ष 2008 के अंत तक इसे पूरा किया जाना था. किर्लोस्कर ने शहर में विभिन्न सह ठेकेदार से कमीशन लेकर काम सौंप दिया था. सहायक ठेकेदार ने योजना पूरी करने में किसी मापदंड का ख्याल नहीं रखा और अपनी सुविधा के अनुरूप ही पाइपलाइन बिछाने का काम किया. इसका परिणाम यह निकला कि पूरा पैसा लग जाने के बाद भी लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल सकी. इसके बाद कई बार धरना प्रदर्शन किया गया. मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की गयी थी. वर्ष 2015 में किर्लोस्कर को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था. उच्च न्यायालय में प्रतिज्ञा संस्था की ओर से दायर याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का आदेश दिया गया है. आनन-फानन में पीएचइडी ने 29 नवंबर को श्री यादवेंदु को जगह-जगह खराब पड़े मोटर व पाइप लीकेज ठीक करने की जिम्मेवारी सौंप दी है.
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