शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए आइएनएपी

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शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए आइएनएपीफोटो- बोधगया 01- कार्यशाला का उद्घाटन करते क्षेत्रीय सहायक निदेशक व अन्य इंडिया न्यू बोर्न एक्शन प्लान के क्रियान्वयन पर कार्यशाला का आयोजनशिशु मृत्यु दर व मृत प्रसव दर को एक अंक में लाने पर दिया गया बलगया जिले के लिए रोडमैप तैयार, प्रखंड स्तर पर शुरू किया […]

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शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए आइएनएपीफोटो- बोधगया 01- कार्यशाला का उद्घाटन करते क्षेत्रीय सहायक निदेशक व अन्य इंडिया न्यू बोर्न एक्शन प्लान के क्रियान्वयन पर कार्यशाला का आयोजनशिशु मृत्यु दर व मृत प्रसव दर को एक अंक में लाने पर दिया गया बलगया जिले के लिए रोडमैप तैयार, प्रखंड स्तर पर शुरू किया जायेगा काम संवाददाता, बोधगयाबिहार में नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए इंडिया न्यू बोर्न एक्शन प्लान (आइएनएपी) को लागू कराने को लेकर मंगलवार को बोधगया के एक होटल में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें एक्शन प्लान को गांव-गांव तक लागू करने के लिए जिले के सभी पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारियों व स्वास्थ्य प्रबंधकों को कई अहम जानकारी दी गयी. पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया व यूनिसेफ बिहार के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति, गया द्वारा आयोजित कार्यशाला में बताया गया कि बिहार की शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 बच्चों पर 42 है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 28 है. आइएनएपी के को-ऑर्डिनेटर मोनिका चौहान ने बताया कि इस प्लान का मुख्य उद्देश्य शिशु मृत्यु दर व मृत प्रसव दर को 2030 तक एक अंक में लाना है. इस प्लान के तहत छह आधारभूत पैकेज हैं, जो ये सुनिश्चित करते हैं कि किस तरह शिशु मृत्यु दर व मृत प्रसव दर को कम किया जाए. इसके लिए रौडमैप तैयार कर बिहार के गया व पूर्णिया जिलों में प्रखंड स्तर पर काम शुरू किया जा रहा है. पीएचसी स्तर पर एएनएम व आशा के सहयोग से गर्भवती महिलाओं व उनके परिजनों में जागरूकता फैलाने व मूलभूत दवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है. कार्यशाला में मौजूद प्रतिभागियों के सहयोग से प्रखंड स्तर पर न्यूबोर्न कार्य योजना को तैयार किया जायेगा. आंकड़े जमा करने के अलावा मृत्यु दर को कम करने के उपायों का क्रियान्वयन किया जायेगा. दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन प्लान से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जायेगी. इस अवसर पर मगध के क्षेत्रीय सहायक निदेशक डॉ विनय कुमार यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ कौशल कुमार मिश्रा, क्षेत्रीय कार्यक्रम पदाधिकारी पीयूष रंजन, मगध मेडिकल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ सुधीर कुमार सिन्हा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ सुरेंद्र चौधरी, यूनिसेफ से डॉ विकास चंद्र नायक, डॉ मनीष नामदेव, डॉ प्रीति नेगांधी, आइएनएपी की रिजनल को-ऑर्डिनेटर (गया) पूनम बंगा व शिरीष तिवारी सहित जिले के सभी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबंधक व सामुदायिक उत्प्रेरक मौजूद थे.

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