बोधगया : स्वार्थ में सुख की प्राप्ति संभव नहीं : दलाई लामा

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विभिन्न देशों के हजारों उपासकों के साथ ही लामा, भिक्षुणी व श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा बोधगया : बोधगया के कालचक्र मैदान में बौद्ध धर्मगुरु 14वें दलाई लामा का गुरुवार से आध्यात्मिक प्रवचन शुरू हुआ. इसमें उन्होंने सुखी जीवन जीने की बात कही व इसके लिए कई तरह की बाधाओं से मुक्ति पाने के रास्ते बताये. […]

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विभिन्न देशों के हजारों उपासकों के साथ ही लामा, भिक्षुणी व श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

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बोधगया : बोधगया के कालचक्र मैदान में बौद्ध धर्मगुरु 14वें दलाई लामा का गुरुवार से आध्यात्मिक प्रवचन शुरू हुआ. इसमें उन्होंने सुखी जीवन जीने की बात कही व इसके लिए कई तरह की बाधाओं से मुक्ति पाने के रास्ते बताये. दलाई लामा ने पहले दिन बोधिसत्वों के 37 अभ्यास का पाठ किया व उसमें उल्लेखित बातों का अनुपालन करने की सीख दी.

प्रवचन में दलाई लामा ने कहा कि हर मानव व जीव सुख चाहता है. इसमें शारीरिक सुख तो पशु भी चाहते हैं, लेकिन मानव को मानसिक सुख की प्राप्ति ज्यादा जरूरी है. इसके लिए दूसरों के प्रति सहानुभूति पैदा करने की जरूरत है. दलाई लाम ने कहा कि स्वार्थ में सुख की प्राप्ति संभव नहीं है और इससे छुटकारा पाने के लिए परहित पर चिंतन करने की आवश्यकता ��ै. धर्मगुरु ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जानवरों के झुंड में से अगर एक भी जानवर अशांत या परेशान हो जायेगा तब उस झुंड के सभी जानवरों को परेशानी महसूस होने लगेगी.

इसी तरह हमारे समाज में भी कोई एक व्यक्ति क्रोधित या अशांत है, तब उसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा. पूरा वातावरण खराब हो जायेगा. अतएव इसका ध्यान हमें रखना चाहिए. उल्लेखनीय है कि दलाई लामा का प्रवचन सुनने के लिए गुरुवार को कालचक्र मैदान में करीब 20-25 हजार उपासक, श्रद्धालु, लामा व भिक्षुणी शामिल हुए. इनमें हॉलीवुड के अभिनेता रिचर्ड गेरे व निर्वासित तिब्बत सरकार के राष्ट्रपति लोपसांग सांग्ये सहित अन्य शामिल थे.

शिक्षा के सहारे क्लेश व अज्ञानता से निकल सकते हैं बाहर

शिक्षा के सहारे क्लेश व अज्ञानता से बाहर निकला जा सकता है. टीचिंग के पहले दिन ही दलाई लामा ने भारत को विभिन्न धर्मों के लोगों का प्रवास करनेवाला देश बताया. उन्होंने बौद्ध लामाओं व भिक्षुणियों को भी संदेश दिया कि शील, समाधि व प्रज्ञा का अभ्यास करना चाहिए और बोधिसत्व की प्राप्ति के लिए तर्कों के आधार पर वास्तविकता का पता लगाना चाहिए. करीब दो घंटे की टीचिंग में दलाई लामा ने व्यक्ति को क्रोध व स्वार्थ आदि से मुक्ति पाने व सफल जीवन जीने का मंत्र दिया.

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