फूलों की डाई से रंगे जायेंगे भिक्षुओं के चीवर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Sep 2018 6:13 AM (IST)
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बोधगया : विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किये जानेवाले फूलों को कचरे में नहीं फेंका जायेगा. अब भगवान बुद्ध को अर्पित फूलों से डाई तैयार की जायेगी व उससे कपड़ों की रंगाई की जायेगी. फूलों की डाई से रंगे जानेवाले कपड़ों में बौद्ध भिक्षुओं के चीवर भी हो सकते हैं व उक्त […]
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बोधगया : विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किये जानेवाले फूलों को कचरे में नहीं फेंका जायेगा. अब भगवान बुद्ध को अर्पित फूलों से डाई तैयार की जायेगी व उससे कपड़ों की रंगाई की जायेगी. फूलों की डाई से रंगे जानेवाले कपड़ों में बौद्ध भिक्षुओं के चीवर भी हो सकते हैं व उक्त रंगीन कपड़ों की महाबोधि मंदिर परिसर में कम कीमत पर बिक्री भी की जायेगी. यह पूरी तरह इको फ्रेंडली हर्बल कलर होगा जिससे शरीर को नुकसान पहुंचने की संभावना काफी कम हो जायेगी.
विभिन्न किस्मों के फूलों से अलग-अलग रंगों की तैयार की जायेंगी डाई आस्ट्रेलिया के एक्सपर्ट केथरिन के सहयोग से फूलों से रंग तैयार किये जायेंगे व मुख्य रूप से खादी कपड़ों को रंगीन किया जायेगा. स्थानीय स्तर पर हैप्पी हैंड (मातृ प्रोजेक्ट) कंपनी के साथ इसके लिए बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (बीटीएमसी) का एमओयू किया गया है जो विभिन्न किस्मों के फूलों से अलग-अलग रंगों की डाई तैयार करने में जुटी है.
शुक्रवार को डीएम सह बीटीएमसी के पदेन अध्यक्ष अभिषेक सिंह ने हैप्पी हैंड के प्रवीण कुमार के साथ ओएमयू का आदान-प्रदान किया. इस अवसर पर डीएम श्री सिंह ने बताया कि महाबोधि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाये जानेवाले फूलों को अब कचरे में नहीं फेंका जायेगा बल्कि उससे डाई तैयार करायी जायेगी. फूलों के डाई से भिक्षुओं के चीवरवाले कपड़ों के साथ ही दूसरे कपड़ों को भी रंगीन किया जा सकेगा. इससे भगवान बुद्ध को अर्पित फूल कचरे में जाने से बच जायेगा व उससे तैयार रंगों की महत्ता भी बढ़ जायेगी. उन्होंने बताया कि हैप्पी हैंड के साथ फिलहाल दो वर्षों के लिए करार किया गया है.
तीन महीने तक नि:शुल्क फूल उपलब्ध करायेगी बीटीएमसी इसके तहत शुरुआती तीन महीने तक सहयोग के निमित्त मातृ प्रोजेक्ट को निशुल्क में फूल उपलब्ध कराये जायेंगे व उसके बाद तीन महीने तक कंपनी के कुल आय का पांच प्रतिशत हिस्सा व उसके बाद 10 प्रतिशत के हिसाब से कंपनी द्वारा मंदिर को दान स्वरूप देना होगा. साथ ही फूलों से रंग तैयार होने के बाद बेस्ट मेटेरियल से कागज तैयार किया जायेगा. हालांकि, भविष्य में उक्त डाई से रंगीन किये गये खादा को भी प्रचलन में लाने की योजना पर विचार किया जा रहा है.
पुल निगम के माध्यम से होगा कार्य
शुक्रवार को डीएम अभिषेक सिंह ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के साथ भी करार किया है. इसके तहत महाबोधि मंदिर परिसर व इससे जुड़े संस्थानों यानी कार्यालय भवन व अन्य के निर्माण पुल निगम की देखरेख में की जायेगी. पुल निगम को बीटीएमसी का कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है, जिसके माध्यम से विकास कार्यों के डिजाइन से लेकर निर्माण का काम किया जायेगा. पहले बीटीएमसी को किसी संवेदक के माध्यम से काम कराना पड़ता था.
पुल निगम के साथ बीटीएमसी का तीन वर्षों का करार हुआ है. कार्यों की बेहतरी के हिसाब से एमओयू की समयावधि बढ़ायी जा सकती है. शुक्रवार को बीटीएमसी के लाइब्रेरी हॉल में पुल निगम के एमडी व हैप्पी हैंड के प्रतिनिधि के साथ किये गये ओएमयू की डीएम ने आदान-प्रदान किया. इस अवसर पर बीटीएमसी के सचिव एन दोरजी, सदस्य डॉ अरविंद कुमार सिंह, महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्खु चालिंदा , केयर टेकर भिक्खु दीनानंद व अन्य मौजूद थे.
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