अक्षय तृतीया : सोना-चांदी से लेकर वाहनों की खरीदारी शुभ

Published at :16 Apr 2018 7:02 AM (IST)
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अक्षय तृतीया : सोना-चांदी से लेकर वाहनों की खरीदारी शुभ

गया : अक्षय तृतीया हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व है. अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं. पौराणिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है. इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है. पिछले कुछ सालों में […]

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गया : अक्षय तृतीया हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व है. अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं. पौराणिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है. इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है. पिछले कुछ सालों में हर पर्व की तरह अक्षय तृतीया के मौके पर भी गहने-जेवर की खरीदारी का ट्रेंड बढ़ा है. क्योंकि इस दिन की खरीदारी को बड़ा ही शुभ माना जाता है, इसलिए ज्योतिष की राय को भी लोग काफी तवज्जो देते हैं.
बाजार से जुड़े जानकारों की मानें तो आडियो-विजुअल माध्यमों के अलावा दूसरे माध्यमों से पर्व के मौके पर आभूषणों की ब्राडिंग ने लोगों का इस ओर झुकाव तेजी से बढ़ाया है. ऐसे में प्रभात खबर की टीम ने अलग-अलग स्तरों से यह समझने की कोशिश की कि गया अब किस तरह इस फेस्टिवल को मनाता है.
खरीदारी की शुभ बेला ज्योतिष मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध व अद्भुत मुहूर्त है. इस तिथि को किसी भी समय दान पुण्य व रत्न, स्वर्ण, वाहनों की खरीदारी की जा सकती है. लेकिन इनमें भी कुछ श्रेष्ठ व शुभ समय होते हैं. अाभूषण, रत्न, भूमि व भवन आदि की खरीदारी स्थिर लग्न में होती है. वाहन, वस्त्रादि की खरीदारी चर लग्न में करना चाहिए. आभूषणों की खरीदारी का समय प्रात: 05 बज कर 56 मिनट से 11 बज कर 50 मिनट, वाहन खरीदने का मुहूर्त प्रात: 07 बज कर तीन मिनट तक सुबह में, दोपहर में 11 बज कर 14 मिनट से दोपहर 01 बज कर 31 मिनट व शाम में 05 बज कर 58 बजे से रात्रि 08 बज कर 14 मिनट तक शुभ मुहूर्त है.
अक्षय तृतीया को लेकर ज्योतिष का है यह कहना
भगवती तारा तंत्र व ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के डॉ सुबोध कुमार मिश्रा बताते हैं कि अक्षय तृतीया शब्द ही स्वयं को परिभाषित करता है. वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं. अक्षय का अर्थ है ‘जो क्षय होने वाला नहीं है’ अर्थात जो नष्ट न होने वाला है. इसे युगादि तिथि की संज्ञा से विभूषित किया गया है. युग का आदि दिवस यानी युग के प्रारंभ होने का दिन. भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म दिवस भी इसी दिन है. अक्षय तृतीया के पुष्प बेला में किया गया समस्त काम का फल अखंड, शास्वत व नष्ट नहीं होने वाला है.
मेष राशि में सूर्य का संक्रमण होने से इस तिथि का महत्व बढ़ जाता है. मन को एकाग्र करने वाली साधना इस तिथि से प्रारंभ की जाती है. न्याय व परिश्रम पूर्वक अर्जित किये गये धन से समस्त अाध्यात्मिक कार्य का संपादन अक्षय पुण्य को प्रदान करता है. शास्त्रों की मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन खरीदा गया स्वर्ण, भूमि, भवन, वाहन व गहने सब अक्षय हो जाते हैं. श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी उस संचित धन की रक्षा करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों को किया गया तर्पण व पिंडदान का पुण्य भी अक्षय होता है. ‘अस्थां तिथौ क्षयमुर्वति हुतं न दतं, तेनाक्षयेति कयिता मुनि भिस्तृतीया’. धार्मिक शास्त्रों में अक्षय तृतीया का महत्व व कथा, घटनाएं, काल क्रम के अनुसार वर्णित किया गया है.
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