Darbhanga: नगर निगम से नहीं मिली मदद तो पार्षद ने खुद उठाया बीड़ा, एक दिन में पकड़े दो दर्जन बंदर
पिंजरा में बंद बंदर | Prabhat Khabar Network
दरभंगा में बंदरों के आतंक से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिलने लगी है. वार्ड 21 के पार्षद ने नगर निगम की राह देखे बिना, निजी खर्च पर बंदर पकड़ने का अभियान शुरू किया है. इस अभियान के पहले दिन दो दर्जन से अधिक बंदरों को पकड़ा गया है.
Darbhanga News: बंदरों के आतंक से परेशान शहरवासियों को नगर निगम की कार्रवाई का इंतजार है, लेकिन वार्ड 21 में एक पार्षद ने खुद पहल करते हुए निजी खर्च पर बंदर पकड़ने का अभियान शुरू कराया है. शुक्रवार को अभियान के पहले दिन करीब दो दर्जन बंदरों को पकड़ा गया. स्थानीय लोगों के अनुसार बंदरों के झुंड के कारण कई लोग घायल हो चुके हैं और घरों में खाने-पीने के सामान को भी नुकसान पहुंच रहा था.
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वार्ड 21 में निजी स्तर पर शुरू हुआ अभियान
वार्ड 21 में पिछले कई दिनों से बंदरों के आतंक से लोग परेशान थे. करीब 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में बंदरों का झुंड एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले में घूमता रहता था. बंदर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते थे और कई बार लोगों पर हमला भी कर चुके हैं.
नगर निगम की ओर से कार्रवाई नहीं होने के बाद पार्षद ने अपने स्तर से बंदर पकड़ने का अभियान शुरू कराया. शुक्रवार को अभियान के पहले दिन करीब दो दर्जन बंदरों को पकड़ा गया.
चार दिन की तैयारी के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन
बंदर पकड़ने के लिए पिछले चार दिनों से तैयारी की जा रही थी. इसके लिए बांस का विशेष पिंजड़ा तैयार कराया गया. साथ ही जाल और बंदरों को आकर्षित करने के लिए फलों की व्यवस्था की गयी.
शुक्रवार को इसी तैयारी के बाद अभियान शुरू किया गया. पकड़े गये बंदरों में लोगों को काटने वाले बंदर भी शामिल हैं.
कुशीनगर से बुलाये गये 10 प्रशिक्षित बंदर पकड़ने वाले
पार्षद के अनुसार, बंदरों को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से 10 प्रशिक्षित लोगों को बुलाया गया है. एक बंदर पकड़ने के लिए करीब 700 से 800 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. इसके अलावा अभियान में शामिल सभी लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था भी पार्षद की ओर से की गयी है.
पकड़े गये बंदरों को वन विभाग की मदद से निर्जन या कम आबादी वाले क्षेत्रों में छोड़े जाने की बात कही गयी है. अभियान आगे भी जारी रहेगा.
एक साल से निगम से की जा रही थी कार्रवाई की मांग
पार्षद ने बताया कि वार्ड में बंदरों के आतंक को लेकर एक साल से अधिक समय से नगर निगम से कार्रवाई की मांग की जा रही थी. वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद निगम स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित की गयी, लेकिन इसके बावजूद अभियान शुरू नहीं हो सका.
बंदरों के हमले में मोहल्ले के कई लोगों के घायल होने के बाद स्थानीय लोगों का दबाव बढ़ा. इसके बाद पार्षद ने अपने निजी खर्च पर बंदर पकड़ने का निर्णय लिया.
लोगों ने स्थायी समाधान की मांग की
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों का आतंक केवल वार्ड 21 तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई हिस्सों में लोग इससे परेशान हैं. बंदरों के झुंड से लोगों को चोट लगने के साथ ही घरों और दुकानों में सामान के नुकसान का भी खतरा बना रहता है.
लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि बंदरों को पकड़ने के लिए स्थायी योजना बनायी जाए, ताकि शहरवासियों को इस समस्या से लंबे समय के लिए राहत मिल सके.
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