कान में खुजली हो रही है? माचिस की तीली या पिन डालना पड़ सकता है भारी
जीवन हास्पिटल में कान की मरीज का इलाज करते डा प्रमोद भारती | Prabhat Khabar Network
कान में खुजली या मैल होने पर नुकीली चीजों का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कान का मैल गंदगी नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच है। जानें कैसे सुरक्षित रखें अपने कान।
Ear Care Tips: कान में खुजली या मैल जमा होने पर अधिकांश लोग माचिस की तीली, हेयर पिन, चाबी, पेन या कॉटन बड से कान साफ करने लगते हैं. डॉक्टरों के अनुसार यह आदत कान के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है. इससे कान का पर्दा फटने, संक्रमण बढ़ने और स्थायी श्रवण क्षमता प्रभावित होने तक का खतरा रहता है.
जीवन अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद भारती ने बताया कि इन दिनों फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण कान से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है. इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने खुद या झोलाछाप से कान साफ कराया था.
कान की वैक्स गंदगी नहीं, शरीर की सुरक्षा प्रणाली है
डॉ. भारती बताते हैं कि कान में बनने वाली वैक्स (Ear Wax या Cerumen) गंदगी नहीं होती. यह शरीर द्वारा बनाई गई एक प्राकृतिक परत है, जो धूल, बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़ों को कान के अंदर जाने से रोकती है.
यह वैक्स कान की त्वचा को नमी भी प्रदान करती है, जिससे कान सूखने और संक्रमण का खतरा कम होता है. सामान्य स्थिति में यह वैक्स अपने आप धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है. इसलिए अधिकांश लोगों को कान साफ करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती.
कॉटन बड भी सुरक्षित नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार कॉटन बड भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. इससे वैक्स बाहर निकलने के बजाय और अंदर चली जाती है, जिससे कान बंद होने, सुनाई कम देने और संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है.
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि "Never put anything smaller than your elbow in your ear", यानी कोहनी से छोटी कोई भी वस्तु कान के अंदर नहीं डालनी चाहिए.
किन चीजों से हो सकता है नुकसान
डॉक्टरों के अनुसार इन वस्तुओं का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए:
- माचिस की तीली
- हेयर पिन
- सेफ्टी पिन
- चाबी
- पेन या पेंसिल
- टूथपिक
- धातु की नुकीली वस्तुएं
इनसे कान की नाजुक त्वचा छिल सकती है, खून निकल सकता है और पर्दा (Eardrum) क्षतिग्रस्त हो सकता है.
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें
यदि निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो ईएनटी विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए:
- कान से लगातार पानी या मवाद आना
- तेज दर्द
- अचानक सुनाई कम देना
- कान में घंटी या सीटी जैसी आवाज (Tinnitus)
- चक्कर आना
- कान से खून निकलना
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
बरसात और अधिक नमी वाले मौसम में फंगल संक्रमण (Otomycosis) तेजी से फैलता है. लंबे समय तक कान में नमी रहने, बार-बार पानी जाने या गलत तरीके से सफाई करने से फंगस विकसित हो सकता है.
डॉक्टर सलाह देते हैं कि नहाने या तैराकी के बाद कान को केवल बाहरी हिस्से से मुलायम तौलिये से सुखाएं. यदि कान में पानी चला जाए और लंबे समय तक भरा महसूस हो तो डॉक्टर से जांच कराएं.
झोलाछाप से कान साफ कराना भी खतरनाक
डॉ. प्रमोद भारती ने कहा कि कई लोग बाजार या सड़क किनारे बैठने वाले झोलाछाप से कान साफ करा लेते हैं. बिना स्टरलाइज उपकरणों से सफाई करने पर संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कई मामलों में कान का पर्दा फटने तक की नौबत आ जाती है.
जीवन अस्पताल में ईएनटी सेवा शुरू
जीवन अस्पताल के निदेशक डॉ. आर.के. झा ने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग पर 20 जुलाई से ईएनटी सेवाएं शुरू की गई हैं. यहां प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ईएनटी विशेषज्ञ मरीजों का उपचार कर रहे हैं. वहीं शनिवार को हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा जांच एवं परामर्श दिया जाता है.
क्या करें, क्या नहीं
करें
- कान के बाहरी हिस्से की ही सफाई करें.
- कान में दर्द, खुजली या सुनने में परेशानी हो तो ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराएं.
- नहाने के बाद कान को सूखा रखें.
न करें
- कान में माचिस, पिन, चाबी या कॉटन बड न डालें.
- झोलाछाप से कान साफ न कराएं.
- घरेलू नुस्खों के नाम पर तेल या अन्य तरल पदार्थ बिना डॉक्टर की सलाह के न डालें.
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लेखक के बारे में
By सुबोध नारायण पाठक
सुबोध नारायण पाठक पिछले 20 सालों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ये सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझते हैं और डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स व नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद करते हैं.
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