सर्दी में देर से व्यायाम करें मधुमेह रोगी

सर्दी में देर से व्यायाम करें मधुमेह रोगीउच्च रक्त चाप रोगी भी ठंढ से करें बचावफोटो संख्या- 11परिचय. डा. मनीष कुमार प्रसाद.दरभंगा. सर्दी का मौसम यूं तो सभी के लिए परेशानी का सबब रहता है, लेकिन इस दौरान मधुमेह व उच्च रक्तचाप के रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत रहती है. खान-पान में परहेज […]
सर्दी में देर से व्यायाम करें मधुमेह रोगीउच्च रक्त चाप रोगी भी ठंढ से करें बचावफोटो संख्या- 11परिचय. डा. मनीष कुमार प्रसाद.दरभंगा. सर्दी का मौसम यूं तो सभी के लिए परेशानी का सबब रहता है, लेकिन इस दौरान मधुमेह व उच्च रक्तचाप के रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत रहती है. खान-पान में परहेज रखने के साथ ही ठंड से खुद को बचाये रखना होता है. अन्यथा बड़ी समस्या खड़ी होने की आशंका प्रबल रहती है. इस संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सक डा. मनीष कुमार प्रसाद बताते हैं कि इस मौसम में लकवा मारने का खतरा सबसे अधिक रहता है. इसलिए सर्दी से इन रोगियों को पूरी तरह बच कर रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में नस सिकुड़ जाता है. इससे स्वस्थ लोगों का ब्लड प्रेशर सामान्य से बढ़ जाता है. ऐसा ही मधुमेह रोगियों के साथ भी होता है. ऐसे में सुगर व ब्लड प्रेशर के मरीज को लकवा का खतरा सर्वाधिक रहता है. इसलिए नियमित व्यायाम व टहलने का समय रोगियों को बदल लेना चाहिए. देर से टहलने के लिए निकलें. बहुत अधिक ठंड हो तो शाम के वक्त का इसमें इस्तेमाल करना बेहतर होता है. उन्होंने आंकड़ा देते हुए बताया कि नये रिसर्च के अनुसार प्रत्येक साल लकवा से मर जाते हैं. मरने वालों में 42 लाख ब्लड प्रेशर के कारण लकवा मारने वाले शामिल रहते हैं. इसलिए ऐसे रोगियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. नमक का सेवन कम से कम करें. हो सके तो रात के वक्त नमक बिल्कुल ही न खायें. खान-पान के संबंध में डा. प्रसाद ने कहा कि मकर संक्र ांति में मधुमेह रोगी तिल का सेवन कर सकते हैं, लेकिन गुड़ वाले तिल के बहुत अधिक सेवन नुकसानदेह हो सकता है. सामान्य सेवन कर सक ते हैं. कारण तिल व गुड़ में ग्लाइसमिक इंडेक्श अपेक्षाकृत कम होता है. वैसे तो प्रत्येक खाद्य पदार्थ में ग्लूकोज का अंश होता है. जिसमें ग्लाइसमिक इंडेक्श कम होता है वह सुगर पेशंेट के लिए कम नुकासनदेह होता है. मधुमेह रोगियों के लिए इस मौसम में लहसून व मेथी का सेवन लाभकारी होता है. कारण इससे शरीर के भीतर गरमी बढ़ती है. इससे वसा घुलता है. वसा घुलने से सुगर कंट्रोल होता है. साथ ही गरमी से सिकुड़े पड़े नस फैलते हैं. जाहिर तौर रक्त संचार सामान्य होता है और रोग का असर कम होता है.
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