अधिक गहराई में न करें प्याज के पौधे की रोपाई

Published at :03 Jan 2016 6:53 PM (IST)
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अधिक गहराई में न करें प्याज के पौधे की रोपाई

अधिक गहराई में न करें प्याज के पौधे की रोपाई कृषि वैज्ञानिकों ने दी किसानों को समसामयिक सलाह दरभंगा. प्याज का पौध जो कि 50-55 दिनों का हो गया हो उसे तैयार क्यारी में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी पर रोपाई करें. पौध की रोपाई […]

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अधिक गहराई में न करें प्याज के पौधे की रोपाई कृषि वैज्ञानिकों ने दी किसानों को समसामयिक सलाह दरभंगा. प्याज का पौध जो कि 50-55 दिनों का हो गया हो उसे तैयार क्यारी में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी पर रोपाई करें. पौध की रोपाई अधिक गहराई में नहीं करें. यह कहना है कि राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा के नोडल ऑफिसर ए. सत्तार का. किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में डा. सत्तार ने किसानों से कहा है कि गेहूं की फसल में खर-पतवार नियंत्रण की सबसे उपयुक्त अवस्था बुआई के 30 से 35 दिनों बाद होती है. गेहूं में उगने वाले सभी प्रकार के खरपतवार के नियंत्रण के लिए पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फयूरॉन 33 ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं मेटसल्फयूरॉन 20 ग्राम प्रति हेक्टेयर दवा 500 लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में छिड़काव करें. ध्यान रहें छिड़काव के वक्त खेत में प्रयाप्त नमी हो. गेहूं की फसल जो 40 से 45 दिनों की हो गयी है तो उसमें दूसरी सिंचाई कर 30 किलो ग्राम नेत्रजन का प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन करें. मक्का की फसल जो 50 से 55 दिनों की हो गयी हो उसमें सिंचाई कर 40 किलो नेत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन कर मिट्टी चढ़ा दें. मटर की फसल में अच्छे फलन के लिए 2 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव करें. सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. आलू में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. चने, मटर और टमाटर की फसल में फली छेदक कीट के नियंत्रण के लिए फिरोेमोन प्रपंश / 3-4 प्रपंस प्रति एकड़ की दर से लगायें. यदि कीट अधिक हो तो बीटी नियमन का छिड़काव करें. मशरूम की वृद्धि पर गिरते तापमान का कुप्रभाव पड़ सकता है. उत्पादन गृह में तापक्रम 25 से 28 डिग्री सेल्सियस बनाये रखें. दुधारु पशुओं के रख-रखाव एवं खान पान पर विशेष ध्यान दें. दुधारु पशुओं के दूध में निम्न तापमान के कारण आयी कमी को दूर करने के लिए नियमित रूप से दाने के साथ कैल्सियम भी खिलायें. पशुओं को रात में खुले स्थानों पर नही रखें. बिछावन के लिए सुखी घास या राख का उपयोग करें.

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