आरक्षित बोगी का हाल जेनरल बोगी से बदतर

Updated at : 04 Apr 2019 5:55 AM (IST)
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आरक्षित बोगी का हाल जेनरल बोगी से बदतर

दरभंगा : होली के बीते एक पखवाड़ा हो गया है, लेकिन अभी तक ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ जस की तस बनी हुई है. त्योहार पर गांव आये लोगों के लिए अभी तक वापसी मुश्किल हो रही है. ट्रेनों में आरक्षण उपलब्ध नहीं रहने की वजह से मजबूरन भेड़-बकरियों की तरह सफर करने के लिए […]

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दरभंगा : होली के बीते एक पखवाड़ा हो गया है, लेकिन अभी तक ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ जस की तस बनी हुई है. त्योहार पर गांव आये लोगों के लिए अभी तक वापसी मुश्किल हो रही है. ट्रेनों में आरक्षण उपलब्ध नहीं रहने की वजह से मजबूरन भेड़-बकरियों की तरह सफर करने के लिए विवश हैं.

इस समस्या की विकरालता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि आरक्षण बोगी में भी यात्रियों को जगह नहीं मिल रही. पांव रखने तक का स्थान खाली नहीं रहता. इस कारण आरक्षित बोगियों की स्थिति जेनरल बोगी से भी बदतर नजर आ रही है
. एक-दूसरे के शरीर पर लटके यात्री किसी तरह रवाना हो रहे हैं. आलम यह है कि रिजर्वेशन बोगी में प्रवेश तक करना मुश्किल है. उल्लेखनीय है कि लंबी दूरी की किसी भी ट्रेन में अभी तक आरक्षण नहीं मिल रहा. सबसे अधिक परेशानी दिल्ली तथा मुंबई की ओर जानेवाले यात्रियों को भुगतनी पड़ रही है.
फाइन भरकर कर रहे यात्रा: कई दिनों तक आरक्षण नहीं मिलने के कारण काम पर नहीं लौट सके यात्रियों के लिए वापसी मुसीबत साबित हो रही है. आरक्षण है नहीं. महत्वपूर्ण ट्रेनों में वेटिंग भी नहीं मिल रहा. ऐसे में यात्री जुर्माना भर कर रिजर्वेश बोगी में किसी तरह सवार हो जाते हैं.
स्लीपर क्लास में 250 रुपये जुर्माना के साथ अन्य शुल्क वसूली के बाद उसमें यात्रा का प्रावधान है. मजबूरन यात्री फाइन भर सफर कर रहे हैं. इस वजह से टीटी की चांदी कट रही है. विभाग की ओर से फाइन काटने का दिया गया लक्ष्य सहज हासिल हो जा रहा है. रेलवे को आय हो रही है. यात्री परेशानी झेल रहे हैं.
सामान्य रूप से स्लीपर क्लास में अधिक यात्री सफर करते हैं. यही कारण है कि किसी भी ट्रेन में एसी की तुलना में कई गुना अधिक स्लीपर क्लास की बोगियां रहती हैं. औसतन 72 सीट एक बोगी में होती है. अधिकांश ट्रेनों में इधर से आरक्षण फुल हो जाने के बाद 400 यात्रियों को रेलवे वेटिंग टिकट जारी करता है. जब वेटिंग मिलना बंद हो जाता है तो लोग मजबूरन टीटी से फाइन कटा इसमें सवार हो जाते हैं. लिहाजा क्षमता से दोगुना यात्री सवार नजर आते हैं.
दिल्ली व मुंबई की ट्रेन में अधिक परेशानी : यूं तो ऑन डिमांड आरक्षण दरभंगा से कोलकाता को छोड़ किसी भी क्षेत्र के ट्रेन में सालों भर नहीं मिलता, लेकिन त्योहार के मौसम में यह समस्या विकराल हो जाती है. इसमें दिल्ली व मुंबई के लिए जानेवाली ट्रेनों में सबसे अधिक भीड़ दिख रही है, जबकि दिल्ली के लिए इस क्षेत्र से नित्य औसतन तीन ट्रेनें चलती है. इसमें दरभंगा से एक मात्र गाड़ी बिहार संपर्क क्रांति का परिचालन होता है. यही हाल मुंबई के लिए भी है. यहां के लिए मात्र पवन एक्सप्रेस दैनिक चला करती है.
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