भरपेट भोजन नहीं, मिलती है मौत

Updated at : 15 Apr 2015 6:23 AM (IST)
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भरपेट भोजन नहीं, मिलती है मौत

अल्पावास गृह : सदर अस्पताल से चार महिलाएं पीएमसीएच रेफर मौत का बसेरा : एक साल में चार महिलाओं की मृत्यु से व्यवस्था पर उठ रहे सवाल मोतिहारी : महिला अल्पावास गृह को बेबस व लाचार महिलाओं का बसेरा कहा जाता है़ इसके संचालन के पीछे मकसद था कि लाचारी व बेबसी में जीने वाली […]

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अल्पावास गृह : सदर अस्पताल से चार महिलाएं पीएमसीएच रेफर
मौत का बसेरा : एक साल में चार महिलाओं की मृत्यु से व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मोतिहारी : महिला अल्पावास गृह को बेबस व लाचार महिलाओं का बसेरा कहा जाता है़ इसके संचालन के पीछे मकसद था कि लाचारी व बेबसी में जीने वाली महिलाओं को नयी जिंदगी दी जा सके.लेकिन तुरकौलिया के रघुनाथपुर स्थित महिला अल्पावास गृह की कहानी ठीक इससे विपरित है़
यहां प्रवास करने वाली महिलाओं को नयी जिंदगी तो नहीं मिल रही, लेकिन मौत जरूर मिल रही है़ जिला प्रशासन के गाइड लाइन पर चलने वाला यह सेंटर मौत का दरवाजा बन चुका है़ यहां लायी जाने वाली महिलाओं की असमय मौत से अल्पावास गृह की व्यवस्था संदेह के घेरे में है़ एक साल के अंदर चार महिलाओं की मौत हो चुकी है़
उनके मौत का कारण क्या है, अगर इसकी सही ढंग से जांच पड़ताल की जाये तो व्यवस्था की कलई खुल सकती है़ बहरहाल उनके मौत का कारण जो हो, लेकिन सोमवार की रात सदर अस्पताल में जीवन व मौत से जूझ रही एक पाकिस्तानी सहित चार महिलाओं की दर्द भरी दास्तान व चिकित्सकों की रिपोर्ट यह साबित कर रही है कि सभी कुपोषण की शिकार हैं. मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि सब में खून की कमी है़
वहीं इलाजरत महिलाओं ने कहा पेट भर खाना नहीं मिलता़ इससे बेहतर से सड़क की जिंदगी थी़ कम से कम भीख में पेट भर खाना तो मिलता था़ इन सारी बातों से स्पष्ट हो रहा है कि भोजन की कमी ही मौत का कारण है़ इधर सोमवार की रात प्रमिला देवी की मौत के बाद आनन-फानन में बीमार चारों महिला निशा मियां, मुन्नी देवी, संध्या अधिकारी व अन्नपूर्णा बावरी को मंगलवार को पटना पीएमसीएच भेजा गया़ चिकित्सकों ने प्रमिला सहित अन्य को 10 रोज पहले से रेफर कर दिया था, लेकिन लापरवाही का नतीजा प्रमिला की मौत हो गयी़
एक महिला के खाने पर 40 रुपये खर्च
महिला अल्पावास गृह में फिलहाल 18 महिलाएं प्रवास कर रही हैं. प्रतिदिन एक महिला पर नाश्ता से लेकर खाना पर 40 रुपये मिलता है़ इसमें सुबह में चाय, नाश्ता में रोटी, सब्जी, खाना में चावल, सब्जी व दाल, शाम में चाय व रात का खाना दिया जाता है़ इतने कम पैसे में इतनी सारी व्यवस्था अपने आप में एक सवाल है़
महिला विकास निगम करता है मॉनीटरिंग
महिला अल्पावास गृह की मॉनीटरिंग महिला विकास निगम करता है़ इसके संचालन का जिम्मा सखी नामक एनजीओ को मिला हुआ है़ प्रवास करने वाली महिलाओं के खाना-पान से लेकर सेंटर के संचालन पर होने वाली खर्च महिला विकास निगम करती है़ उनके द्वारा जिलाधिकारी को फंडिंग की जाती है़ जहां से एनजीओ को खर्च करने के लिये पैसा मिलता है़
जिला प्रशासन से महिलाओं के खान-पान के लिए जितना पैसा मिलता है, उसके हिसाब से उन्हें भोजन व दिया जाता है़ हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 40 रुपये में पर्याप्त मात्र में सब कुछ देना मुमकिन नहीं है़ खाना का पैसा भी समय पर नहीं मिलता़ दुकान से उधार समान लेकर खाना की व्यवस्था की जाती है़ कर्मियों का पेमेंट 15 महीना से नहीं मिला रहा़
बबिता श्रीवास्तव, महिला अल्पावास गृह की संचालक
मामले की जांच की जायेगी़ उनसे फंडिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि समय से पैसा दिया जाता है, जब संचालिका की बातों को उनके पास रखा गया तो उन्होंने कहा कि फाइल देखने के बाद बतायेंग़े उन्होंने मौत के कारणों के संबंध में कहा कि चिकित्सक से बात की जायेगी़
प्रवीण कुमार, नोडल पदाधिकारी
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