बक्सर: भरखर में जैविक खेती प्रशिक्षण शिविर आयोजित, किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत व नीमास्त्र बनाने की दी गई तकनीक

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प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को जानकारी देते प्रशिक्षक | Prabhat Khabar Network

बिहार के बक्सर में किसानों को जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उत्पादों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे खेती की लागत कम और उर्वरता बढ़ सके.

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Buxar News: बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा संचालित जैविक कॉरिडोर योजना के अंतर्गत रविदास बाबा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड स्थित कांट पंचायत के भरखर गांव में एक दिवसीय जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र के किसानों को जैविक खेती की वैज्ञानिक तकनीकों, जैव उत्पादों के निर्माण और उनके सही उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई.

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कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि जैविक खेती अपनाकर न सिर्फ मिट्टी की घटती उर्वरता को दोबारा बहाल किया जा सकता है, बल्कि रासायनिक खादों पर होने वाले भारी खर्च को घटाकर खेती की लागत भी कम की जा सकती है.

खेत की तैयारी से लेकर कटाई तक जैविक उत्पादों के प्रयोग पर जोर

सहायक तकनीकी प्रबंधक सह आईसीएस प्रबंधक विवेकानंद उपाध्याय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जैविक खेती के लिए खेत की जुताई से लेकर फसल कटाई तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है:

  • प्रमुख जैव उत्पाद: उन्होंने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, घन जीवामृत, पीएसबी कल्चर, बीजामृत, जीवामृत, सहजन टॉनिक, कंडे/उपलों से निर्मित ह्यूमिक एसिड, दही का स्प्रे, ट्राइकोडर्मा, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र बनाने तथा कीट नियंत्रण में इनके इस्तेमाल की विधियां समझाईं.
  • देशी गाय का महत्व: उन्होंने कहा कि जैविक खेती को सफल बनाने के लिए किसानों को कम से कम एक देशी गाय जरूर पालनी चाहिए, क्योंकि गाय के गोबर व गोमूत्र से कई प्रकार के शक्तिशाली प्राकृतिक उर्वरक और कीटनाशक तैयार होते हैं.

वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद से बढ़ेगी मिट्टी की शक्ति

कृषि समन्वयक सह प्रशिक्षक मृत्युंजय मिश्रा ने किसानों को केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) तैयार करने की चरणबद्ध विधि बताई:

  • हरी खाद की उपयोगिता: उन्होंने मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने के लिए मूंग और ढैंचा जैसी हरी खाद लगाने की सलाह दी.
  • खेती और पशुपालन का संतुलन: उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं. फसलों के अवशेष मवेशियों का चारा बनते हैं और मवेशियों का अपशिष्ट फसलों के लिए सर्वोत्तम पोषण बनता है.

प्रशिक्षण के दौरान प्रगतिशील किसान हरेराम महतो, राजग्रही साह और मंतोष कुमार ने जैविक विधि से की जा रही अपनी फसलों के सकारात्मक अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए. कार्यक्रम में कृषि समन्वयक विनय रंजन सहित दर्जनों किसान उपस्थित रहे.

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