बक्सर: रामपुर पंचायत में दम तोड़ रहा लोहिया स्वच्छता अभियान, ठेले और कूड़ेदान बने कबाड़

रामपुर में अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई
बक्सर के केसठ प्रखंड के रामपुर में लोहिया स्वच्छता अभियान दम तोड़ रहा है। घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था ठप है, जिससे गांवों में गंदगी का अंबार लग गया है। बरसात में स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ गया है।
Buxar Swachhta Abhiyan Mission Fails : बक्सर जिले के केसठ प्रखंड के रामपुर पंचायत में सरकार की महत्वाकांक्षी लोहिया स्वच्छता अभियान अब दम तोड़ता नजर आ रहा है. जिस योजना के जरिए गांव को साफ-सुथरा और कचरा मुक्त बनाने का सपना देखा गया था, वही अब बदहाल स्थिति में पहुंच गई है. हालात ऐसे हो गए हैं कि पंचायत के कई वार्डों में कूड़ा उठाव पूरी तरह ठप हो चुका है और जगह-जगह गंदगी का अंबार लग गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय यह अभियान काफी प्रभावी ढंग से चल रहा था. घर-घर से कचरा उठाने के लिए ठेले और कूड़ेदान दिए गए थे, जिससे गांव में सफाई की व्यवस्था बेहतर होती दिख रही थी. लेकिन धीरे-धीरे यह पूरी व्यवस्था चरमराने लगी और अब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है.
Buxar News : एक साल में ही बेकार हो गए संसाधन
सरकार की ओर से पंचायत को ठेले, कूड़ेदान और स्वच्छता कर्मियों की सुविधा दी गई थी ताकि हर घर से कचरा इकट्ठा कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा सके. शुरुआत में सब कुछ ठीक चला, लेकिन एक साल के अंदर ही अधिकांश ठेले और कूड़ेदान बेकार हो गए. अब ये संसाधन उपयोग में आने के बजाय कबाड़ की तरह पड़े हैं.
गांव के कई इलाकों में कूड़ेदान टूटे-फूटे हालत में दिखाई दे रहे हैं. वहीं ठेले भी इस्तेमाल के अभाव में जंग खा रहे हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि योजना की निगरानी और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया.
मानदेय बकाया, कर्मियों ने छोड़ा काम
इस समस्या की सबसे बड़ी वजह स्वच्छता कर्मियों का बकाया मानदेय बताया जा रहा है. लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण अधिकतर कर्मियों ने काम करना बंद कर दिया है. जब कर्मी ही काम पर नहीं हैं, तो कूड़ा उठाव की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है.
इसका सीधा असर पंचायत की साफ-सफाई पर पड़ा है. वार्डों में नियमित कचरा उठाव नहीं होने से सड़कों और गलियों में गंदगी फैल गई है. लोग अपने घरों का कूड़ा खुले में फेंकने को मजबूर हैं.
बरसात में बढ़ा बीमारी का खतरा
बरसात के मौसम में गंदगी और कचरे के ढेर से हालात और भी खराब हो गए हैं. जगह-जगह जमा कूड़ा सड़ने लगा है, जिससे बदबू फैल रही है. इसके कारण संक्रमण और कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ने की आशंका है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द इस व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं.
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
इस मामले में स्वच्छता पर्यवेक्षक अयोध्या प्रसाद ने बताया कि स्वच्छता कर्मियों का मानदेय लंबे समय से बकाया है, जिसके कारण अधिकांश कर्मियों ने काम छोड़ दिया है. इसी वजह से ठेले के माध्यम से कूड़ा उठाव बंद हो गया है.
उन्होंने कहा कि जैसे ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी होगी, स्वच्छता व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास किया जाएगा.
अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर
फिलहाल रामपुर पंचायत में स्वच्छता अभियान की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. लोगों की नजर अब प्रशासन पर टिकी है कि कब तक बकाया भुगतान होता है और सफाई व्यवस्था दोबारा शुरू होती है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना पूरी तरह विफल हो सकती है.
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