Buxar News: शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां की जयंती पर महोत्सव 21 को
Author Raviranjan kumar singh
Updated:
विज्ञापन
21 मार्च को डुमरांव में शहनाई वादक भारत रन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की जयंती पर शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है
विज्ञापन
डुमरांव
. 21 मार्च को डुमरांव में शहनाई वादक भारत रन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की जयंती पर शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. इस आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है. यह इलाका कला मर्मज्ञों की भूमि है. बिस्मिल्लाह था महोत्सव में कला संस्कृति विभाग की तरफ से उस्ताद पर लगातार काम करने वाले लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव को आमंत्रित किया गया है. इस संदर्भ में श्री श्रीवास्तव ने कहा कि उस्ताद की कृतियों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डुमरांव में स्थापित कर उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है. वर्ष 2013 से श्री मुरली उस्ताद के नाम पर विश्वविद्यालय को स्थापित करने के लिए लगे रहे. जिसको कॉलेज के रूप में मुख्यमंत्री ने मूर्त रूप देने का काम किया है. आगे उन्होंने कहा कि डुमरांव में 21 मार्च 1916 को जन्में कमरुद्दीन ही आगे चलकर शहनाई नवाज उस्ताद बिस्मिल्लाह खां बन गए. वैसे तो उस्ताद तीन भाई थे शम्सुद्दीन, कमरुद्दीन और सौतेले भाई पचकौड़ी मिया. तीनों भाईयों में अटूट प्रेम था. दो भाई बनारस तो पंचकौड़ी मियां ने अपनी पूरी जिंदगी डुमरांव में ही गुजार दी. बिस्मिल्लाह और शहनाई सिक्के के दो पहलू है. डुमरांव राज के बांके विहारी मंदिर के प्रांगण में उस्ताद के अब्बा शहनाई वादन का काम किया करते थे. बक्सर जिला गंगा-जमनी तहजीब की बड़ी मिसाल है. यहां के लोग आपसी मिल्लत के साथ रहते हैं, तो उस्ताद भी इसके बड़े उदाहरण थे. पांच समय के नमाजी बिस्मिल्लाह खां मंदिरों में शहनाई वादन किया करते थे. ये वही डुमरांव है जिसकी सोधी मिट्टी ने कमरुद्दीन की शहनाई पर ऐसी राग छेड़ी की पूरी दुनिया उनकी मुरीद बन गई. वर्ष 1979 में बिस्मिल्लाह खां ने डुमरांव महाराज के बड़े बाग में भोजपुरी फिल्म बाजे शहनाई हमार अंगना का मुहूर्त के लिए आए थे. उस वक्त इस फिल्म के सूत्रधार डॉ शशि भूषण श्रीवास्तव के अपने निजी मकान में ही ठहरे थे. ज्ञात हो कि 15 नवंबर 2009 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का लोकार्पण पटना में किया था. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि डुमरांव में उस्ताद की जयंती को राजकीय समारोह के रुप में मनाया जाएगा और उस्ताद के नाम पर कोई कृति स्थापित की जाएगी. उन सबको मुख्यमंत्री ने पूरा कर दिया. इसके बाद कला संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2015 में पटना में आयोजिय कार्यक्रम मे मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा निर्मित बिस्मिल्लाह और शहनाई डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया था. गंगा-जमनी तहजीब को क़ायम रखने के लिए श्री मुरली छठ का व्रत रखते हैं तो पिछले दो दशक से भी ज्यादा से रमजान के महीने में रोजा रखते आ रहे हैं. इनका मानना है कि मानवता से बड़ी इस दुनिया मे कुछ भी नहीं है. इतना ही नहीं बिस्मिल्लाह खां की कृति को डुमरांव में स्थापित करने का श्रेय मुरली मनोहर श्रीवास्तव को दिया जाता है. उन्होंने कौन क्या कहता है इसकी कभी परवाह नहीं की और निरन्तर अपने काम में लगे रहे आज उसी का नतीजा है कि उस्ताद के नाम पर कॉलेज भी डुमरांव में स्थापित हो जाएगा.विज्ञापन
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन