बक्सर के रोहित दुबे ने नोएडा के राष्ट्रीय शैक्षिक कॉन्क्लेव में रखे विचार, शिक्षा और करियर के बदलते स्वरूप पर दिया जोर

Updated:
विज्ञापन

कार्यक्रम में अतिथियों के साथ मंचासीन रोहित दुबे फोटो कार्यक्रम को संबोधित करते जिले के युवा | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

युवा लेखक-वक्ता रोहित दुबे ने नोएडा में राष्ट्रीय शैक्षिक कॉन्क्लेव में शिक्षा के बदलते स्वरूप, विद्यार्थियों के भविष्य और करियर की तैयारी पर अपने विचार रखे. उन्होंने तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ फ्यूचर स्किल्स की अहमियत पर जोर दिया.

विज्ञापन

Buxar News : नगर के श्री कृष्ण नगर कॉलोनी निवासी दिवंगत डॉ. बैजनाथ दुबे के पुत्र एवं युवा लेखक-वक्ता रोहित दुबे ने नोएडा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षिक कॉन्क्लेव में बतौर पैनलिस्ट भाग लिया. देशभर से जुटे कुलपतियों, शिक्षाविदों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच उन्होंने शिक्षा के बदलते स्वरूप, विद्यार्थियों के भविष्य और करियर की तैयारी को लेकर अपने विचार रखे.

विज्ञापन

तकनीकी ज्ञान के साथ फ्यूचर स्किल्स जरूरी

कॉन्क्लेव के पहले दिन ‘इंडस्ट्री 5.0 के लिए फ्यूचर स्किल्स’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में रोहित दुबे ने कहा कि आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा. उन्हें बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करने के लिए कई तरह के कौशल विकसित करने होंगे.

उन्होंने सीखने की ललक, रचनात्मकता, प्रभावी संवाद कौशल, समस्या-समाधान की क्षमता, टीम के साथ काम करने की योग्यता, आत्मविश्वास और बदलते परिवेश के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि यही कौशल विद्यार्थियों को भविष्य की प्रतिस्पर्धा में बेहतर तरीके से आगे बढ़ने में मदद करेंगे.

प्रतिष्ठित शिक्षाविदों के साथ साझा किया मंच

पैनल चर्चा में रोहित दुबे ने देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों के साथ मंच साझा किया. इनमें प्रो. (डॉ.) टंकेश्वर कुमार, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, यश पाल सिंह कंवर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं डीन, जेआईएमएस रोहिणी, प्रो. (डॉ.) राजीव सूद, कुलपति, बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, प्रो. (डॉ.) सतीश चंदर शर्मा, प्रति-कुलपति, बीबीडी विश्वविद्यालय लखनऊ, डॉ. रिपुदमन गौर, डीन, लॉयड बिजनेस यूनिवर्सिटी, अंकुर गिल, निदेशक, स्वामी विवेकानंद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, चंडीगढ़ और प्रो. संजय एस. जाधव, महात्मा गांधी मिशन कॉलेज, नवी मुंबई शामिल थे.

अच्छे अंक से आगे बढ़कर शिक्षा का लक्ष्य तय करने पर जोर

कॉन्क्लेव के दूसरे दिन ‘बियॉन्ड मार्क्स - वे कौशल जो वास्तव में मायने रखते हैं’ विषय पर चर्चा हुई. इस सत्र में रोहित दुबे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं होना चाहिए. विद्यार्थियों को जीवन और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य है.

उन्होंने कहा कि आज के दौर में रचनात्मक सोच, सही निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और लगातार सीखते रहने की प्रवृत्ति विद्यार्थियों की वास्तविक पूंजी है. शिक्षा व्यवस्था को इन क्षमताओं के विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए.

शिक्षा से करियर तक की यात्रा पर कर रहे काम

दूसरे पैनल में रोहित दुबे ने शिवप्रकाशम रमन, निदेशक, इरोड हिंदू कल्वी निलयम, अमरेंद्र पांडेय, संस्थापक निदेशक, जीके मेमोरियल स्कूल और डॉ. जसजीत सूद, प्रधानाचार्य, ओपीएस विद्या मंदिर, करनाल के साथ अपने विचार साझा किये.

उल्लेखनीय है कि रोहित दुबे लंबे समय से शिक्षा, युवा विकास और शिक्षा से करियर की ओर संक्रमण जैसे विषयों पर लेखन और वक्तव्य देते रहे हैं. उनका मानना है कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करना नई शिक्षा का मूल मंत्र होना चाहिए.

फोटो- कार्यक्रम में अतिथियों के साथ मंचासीन रोहित दुबे फोटो कार्यक्रम को संबोधित करते जिले के युवा | Prabhat Khabar Network
फोटो- कार्यक्रम में अतिथियों के साथ मंचासीन रोहित दुबे फोटो कार्यक्रम को संबोधित करते जिले के युवा | Prabhat Khabar Network
फोटो- कार्यक्रम में अतिथियों के साथ मंचासीन रोहित दुबे फोटो कार्यक्रम को संबोधित करते जिले के युवा | Prabhat Khabar Network
फोटो- कार्यक्रम में अतिथियों के साथ मंचासीन रोहित दुबे फोटो कार्यक्रम को संबोधित करते जिले के युवा | Prabhat Khabar Network

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन