अब पटवन की चिंता नहीं तैयारी. बक्सर जिले के तीन तालाबों का होगा जीर्णोद्धार

Updated at : 01 Feb 2017 3:51 AM (IST)
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अब पटवन की चिंता नहीं तैयारी. बक्सर जिले के तीन तालाबों का होगा जीर्णोद्धार

पानी के अभाव में किसानों की फसलें नहीं होंगी अब बरबाद बक्सर : अब पानी के अभाव में किसानों की फसलें बरबाद नहीं होंगी. पीएम सिंचाई ड्राप मोर क्रॉप योजना के तहत बक्सर जिले के तीन तालाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने राशि स्वीकृत कर दी है. बक्सर जिले […]

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पानी के अभाव में किसानों की फसलें नहीं होंगी अब बरबाद

बक्सर : अब पानी के अभाव में किसानों की फसलें बरबाद नहीं होंगी. पीएम सिंचाई ड्राप मोर क्रॉप योजना के तहत बक्सर जिले के तीन तालाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने राशि स्वीकृत कर दी है. बक्सर जिले में सुखाड़ के कारण किसानों की फसलें बरबाद हो जाती हैं. इस योजना के तहत जिन तीन तालाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा. उससे लगभग 300 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी.
पीएम सिंचाई डॉप मोर योजना के तहत एक-एक बूंद पानी को सिंचाई के उपयोग में लाया जायेगा. इससे इन इलाकों के तालाबों में जलस्तर की वृद्धि होगी. वहीं, लोगों को सिंचाई के लिए पानी आसानी से उपलब्ध होगा. तालाबों के जीर्णोद्धार का मेन मकसद यह है कि वर्षा के समय में इन तालाबों में अधिक-से-अधिक मात्रा में पानी इकट्ठा किया जा सके.
क्या है पीएम सिंचाई ड्राप मोर क्रॉप योजना : जिन जिलों में सूखे की स्थिति ज्यादा बनी रहती है. उन जिलों के लिए पीएम सिंचाई ड्राप मोर क्रॉप योजना वरदान साबित होगी. इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने ऐसे जिलों को चिह्नित कर इस योजना से जोड़ने के लिए निर्देश दिया था. इस योजना के तहत जो पुराने तालाब रखरखाव के अभाव में खराब हो चुके हैं या उनमें गाद जमा हो गया है. वैसे तालाबों की गाद की सफाई कर ज्यादा-से-ज्यादा पानी इकट्ठा किया जायेगा, ताकि सुखाड़ के वक्त इन तालाबों से फसल की सिंचाई की जा सके. इसकी मॉनीटरिंग के लिए एक टीम भी बनायी गयी है.
तालाबों के जीर्णोद्धार से 300 हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई
पीएम सिंचाई ड्राप मोर क्रॉप योजना द्वारा जिले के तीन तालाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा, जिसमें पहले फेज में पुराने तालाबों को चिह्नित किया गया है. हालांकि और जगहों पर पुराने तालाबों को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है. वर्तमान में जिले के मठिला पोखरा है, जो 52 बीघे में है. इसके साथ ही कई और तालाबों को चिह्नित किया गया है. जिनका जीर्णोद्धार किया जायेगा. उन्होंने कहा कि इन तालाबों और पोखराें के जीर्णोद्धार होने से लगभग 300 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी. उन्होंने कहा कि अभी कितनी राशि खर्च होगी इसका डीपीआर तैयार नहीं किया गया है. चिह्नित करने के बाद डीपीआर भी तैयार कर विभाग को भेज दिया जायेगा.
रणवीर सिंह,जिला कृषि पदाधिकारी
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