धान में तना छेदक िकट व गलका का बढ़ा प्रकोप
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Sep 2016 4:58 AM (IST)
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कई दिनों से बारिश नहीं होने कारण इन रोगों से ग्रस्त है धान की फसल बक्सर : जिले में धान की फसलों की तना छेदक कीट व गलका का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. रोजना लगभग सैकड़ों किसान कृषि विज्ञान केंद्र में अपनी समस्या लेकर आ रहे हैं. केवीके के कृषि वैज्ञानिक राम केवल […]
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कई दिनों से बारिश नहीं होने कारण इन रोगों से ग्रस्त है धान की फसल
बक्सर : जिले में धान की फसलों की तना छेदक कीट व गलका का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. रोजना लगभग सैकड़ों किसान कृषि विज्ञान केंद्र में अपनी समस्या लेकर आ रहे हैं. केवीके के कृषि वैज्ञानिक राम केवल ने बताया कि जिले में 90 हजार से अधिक क्षेत्रफल में धान की खेती की गई है. फिलवक्त धान के फसल में तनाछेदक कीट का प्रकोप बढ़ गया है. जिले के बक्सर, इटाढ़ी, राजपुर, सिमरी, ब्रह्मपुर, चक्की, चौसा, बक्सर आदि से सैकड़ों किसानों ने केवीके में इस कीट की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि पिछले कई दिनों से बारिश कम होने से इस रोग का प्रकोप बढ़ रहा है. ऐसे समय में किसानों को घबराना नहीं चाहिए.
धान की फसलों पर दवाओं का छिड़काव कर इन रोगों से बचाया जा सकता है. सबसे अहम बात है कि समय रहते यदि किसानों ने दवाओं का छिड़काव नहीं किया, तो फसल पूरी से बर्बाद हो जायेगी. तना छेदक कीट का पहचान करना बहुत आसान है. यह कीट सफेद रंग के पके हुए चावल जैसा दिखता है. इसका मुंह लाल या काले रंग का होता है. यह बढ़ रहे धान के पौधे के गोभ को अंदर से काट देता है. इससे शुरू में यह पीला फिर लाल और अंत में काले रंग का होकर सूख जाता है. इसके कारण फलियों के अंदर सूडी दिखाई देती है. इसके निदान के लिये किसानों को क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी नामक रसायन का 60 एमएल प्रति एकड़ या फिपरोनिल 5 एससी 500 एमएल प्रति एकड़ या फिपरोनिल 80 डब्लूजी का 20 ग्राम प्रति एकड़ या फ्लूबेंडी माइड 39.35 एससी की 20 एमएल प्रति एकड़ या करटॉप 50 एसपी का 400 ग्राम प्रति एकड़ या क्लोरपायरीफास 20 ईसी का 1000 एम़एल प्रति एकड़ या मोनोक्रोटोफॉस 36 एसएल नामक रसायन का 500 एमएल प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करना होगा.
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