मुसलिम परिवारों में बने महावर से होती है पूजा

डुमरांव : ईबादत के लिये धर्म संप्रदाय कोई मायने नहीं रखता. अगर ऐसा ही होता, तो मुसलिम परिवार द्वारा निर्मित महावर (रूई का बना अड़ता) व दलितों द्वारा बनाया हुआ सुपली व दउरा हिंदू धर्म के पवित्रता और आस्था के छठ पर्व में उपयोग में नहीं आता. जिन लोगों ने समाज में छुआछूत व ऊंच […]
डुमरांव : ईबादत के लिये धर्म संप्रदाय कोई मायने नहीं रखता. अगर ऐसा ही होता, तो मुसलिम परिवार द्वारा निर्मित महावर (रूई का बना अड़ता) व दलितों द्वारा बनाया हुआ सुपली व दउरा हिंदू धर्म के पवित्रता और आस्था के छठ पर्व में उपयोग में नहीं आता. जिन लोगों ने समाज में छुआछूत व ऊंच नीच की भ्रांतिया फैलाई है,
उन्हें लोक आस्था का महापर्व छठ जैसे त्योहरों से सबक लेनी चाहिए़ इसमें मजहब और संप्रदाय कोई मायने नहीं रखता़ मुसलिम परिवारों द्वारा बनाये गये महावरों से हिंदू परिवार छठ किया करते हैं.
चिक बिरादरी के लोग महावर बना कर अपने बच्चों को बाजारों में बेचने के लिए भेज देते है़ं मोहम्मद ईसराइल, मो. शमीम सहित महावर बनानेवाले लोगों ने बताया कि चिक टोली में बने महावर बक्सर, ब्रह्मपुर, शाहपुर, कृष्णाब्रह्म कोरानसराय, चौगाई सहित आरा तक व्यवसायी खरीदकर ले जाते है़ं
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