जलावन के अभाव में नहीं जल रहे चूल्हे

Published at :04 Sep 2013 4:28 AM (IST)
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जलावन के अभाव में नहीं जल रहे चूल्हे

बक्सर : गंगा का उफान थमने के बाद भी बाढ़ग्रस्त इलाके के लोगों की परेशानियां बरकरार है. सबसे अधिक उत्तरी इलाके के लोग बाढ़ से ग्रस्त हैं. दियारांचल के उत्तरी इलाके में बाढ़ से आम जनजीवन ठहर सा गया है. बाढ़ से घिरे गांव के लोग हर दिन कठिन चुनौतियों से जूझ रहे हैं. उस […]

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बक्सर : गंगा का उफान थमने के बाद भी बाढ़ग्रस्त इलाके के लोगों की परेशानियां बरकरार है. सबसे अधिक उत्तरी इलाके के लोग बाढ़ से ग्रस्त हैं. दियारांचल के उत्तरी इलाके में बाढ़ से आम जनजीवन ठहर सा गया है.

बाढ़ से घिरे गांव के लोग हर दिन कठिन चुनौतियों से जूझ रहे हैं. उस पर लगातार हो रही बारिश के कारण स्थितियां और भी भयावह हो गयी है. जलावन के अभाव में कई घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं. जिले के उत्तरी इलाके के ब्रrापुर प्रखंड स्थित नैनीजोर की हालत सबसे दयनीय है. बाढ़ से घिरे गांव के गरीब तबके के लोग दानेदाने को मोहताज हो गये हैं. नैनीजोर के ग्रामीण राम केवल का कहना है कि राहत वितरण में भी बड़े पैमाने पर भेदभाव बरता जा रहा है.

बाढ़पीड़ित गरीबों को राहत नहीं मिल पा रही है. सिमरी, चौसा और सदर प्रखंड के गांवों में स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है. सदर प्रखंड के उमरपुर, मझरिया, गड़नी सहित अन्य गांवों की स्थिति भयावह बनी हुई है. उमरपुर के ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध पर पानी के दबाव से जहां ग्रामीण दहशत में हैं, वहीं बाढ़ से गांव के घिरने के कारण आवागमन पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है.

चौसा के बनारपुर, नरबतपुर, खिलाफतपुर में बाढ़ से ग्रामीणों की स्थिति बिगड़ने लगी है. सबसे खराब स्थिति उन लोगों की है, जो मेहनत मजदूरी कर परिवार की गाड़ी खींचते हैं. वैसे परिवार बाढ़ के कारण पूरी तरह लाचार हो गये हैं. इधर, जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति में वरीय उपसमाहर्ता सह प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अरुण प्रकाश ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत का काम तेजी से चलाया जा रहा है.

अब तक 4128 क्विंटल गेहूं 4128 क्विंटल चावल का वितरण बाढ़पीड़ितों के बीच की जा चुकी है. नकद राशि के रूप में बाढ़पीड़ितों के बीच 55 लाख रुपये का वितरण किया गया है.

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