कटाव से किले के अस्तित्व पर संकट

Published at :25 Aug 2013 1:05 AM (IST)
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कटाव से किले के अस्तित्व पर संकट

बक्सर: गंगा के कटाव से बक्सर के ऐतिहासिक किला के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है. किले के बाहरी उत्तरी भाग में गंगा के उफान से कटाव होना शुरू हो गया है. उत्तरी भाग में किले के समतल भाग का एक हिस्सा कट कर गंगा के गर्भ में समा चुका है. वहीं, उत्तरी भाग में […]

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बक्सर: गंगा के कटाव से बक्सर के ऐतिहासिक किला के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है. किले के बाहरी उत्तरी भाग में गंगा के उफान से कटाव होना शुरू हो गया है. उत्तरी भाग में किले के समतल भाग का एक हिस्सा कट कर गंगा के गर्भ में समा चुका है. वहीं, उत्तरी भाग में चार फुट चौड़ा व 20 फुट लंबा भाग में दरार पड़ गया है. इस भाग के भी कट जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. इसके साथ ही किले के महज कुछ मीटर पर अवस्थित जिला जज एवं एडीएम के आवास पर कटाव का खतरा बढ़ गया है. गंगा के कटाव की भयावहता को देखने के लिए नगरवासियों का हुजूम किले पर पहुंचने लगा है.

1054 ई0 में हुआ था निर्माण

बक्सर नगर स्थित ऐतिहासिक किले का निर्माण 1054 ई0 में महाराजा रुद्रदेव ने कराया था. गंगा के उफान को देखते हुए महाराज देव ने एक विशाल टीले का निर्माण कराया था, ताकि किला सुरक्षित रह सके, लेकिन गंगा के तेज धार के सामने दिन प्रति दिन किले में कटाव होते गया. अब इसके अस्तित्व पर संकट गहराने लगा. यह किला दुनिया का संभवत: सबसे छोटा किला है. सर्वप्रथम इस किले की खुदाई 1927 ई. में पटना विश्वविद्यालय के प्रो. आशुतोष बनर्जी शास्त्री के नेतृत्व में कराया गया था. खुदाई में भारी मात्रा में टेराकाट, बरतन तथा ईंट की प्राप्ति हुई थी. साथ ही पूर्व मौर्य कालिक स्त्री की एक खंडित प्रतिमा भी मिली थी. जनवरी 1964 में बिहार सरकार ने पुन: आदित्य नारायण के नेतृत्व में खुदाई शुरू करायी, जिसमें कई पुरातत्व सामग्री प्राप्त हुए थे.

लूट की भंेट चढ़ी ठोकर

किले को बचाने के लिए राज्य सरकार ने किले के किनारे ठोकर का निर्माण कराया था. निर्माण शुरू होने के साथ ही घटिया निर्माण के कारण स्थानीय लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया था. तत्कालीन विधायक प्रो. हृदय नारायण सिंह ने विधानसभा में मामले को उठाते हुए ठोकर निर्माण में धांधली बंद कराने की मांग की थी. इसके बावजूद सरकार स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. सब कुछ पूर्व की तरह चलता रहा. नतीजा यह हुआ कि लाखों खर्च के बावजूद भी किले का एक बड़ा हिस्सा कटाव के कारण गंगा के गर्भ में समा गया. अब किले का एक और बड़ा हिस्सा गंगा के गर्भ में समाने की स्थिति में पहुंच चुका है.

सरकारी आवासों पर खतरा

गंगा में हो रहे कटाव के कारण किले के ऊपरी हिस्से में बने जिला जज एवं एडीएम के आवास पर भी खतरा मंडराने लगा है. कटाव के कारण एक बड़े हिस्से के गंगा में समाने के कारण किले के अंतिम छोर से महज पांच से छह फुट दूर उक्त आवासों की बाउंड्री है. यदि गंगा का तेज प्रवाह कुछ दिनों तक इसी तरह रहा, तो कटाव बाउंड्री तक पहुंच जायेगा.

बक्सर नगर पर बढ़ा खतरा

गंगा के बक्सर नगर में प्रवेश पर पहला मोड़ किला ही है. इसी के बाद गंगा आगे की ओर बढ़ती है और किले का कटाव अगर इसी तरह जारी रहा, तो निश्चय ही कटाव से बक्सर नगर पर खतरा बढ़ जायेगा. गंगा का घुमाव नगर की तरफ न हो जाये, इसे लेकर भी नगरवासियों में भय व्याप्त है.

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