बारिश व आंधी देख सिर पकड़ बैठ गये किसान, फसलों को नुकसान

Published at :31 Mar 2015 6:56 AM (IST)
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बारिश व आंधी देख सिर पकड़ बैठ गये किसान, फसलों को नुकसान

वर्षा से तेलहन, दलहन व गेहूं को नुकसान, तेज आंधी व पानी से जनजीवन अस्त-व्यस्त बक्सर/राजपुर/धनसोई/चक्की : शुक्रवार को आयी आंधी-पानी के बाद फसल की तबाही से किसान उबर भी नहीं पाये थे, तभी सोमवार को फिर मौसम बिगड़ गया और तेज हवा के साथ वर्षा हुई, जिससे किसान बुरी तरह आहत हो गये. चैत […]

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वर्षा से तेलहन, दलहन व गेहूं को नुकसान, तेज आंधी व पानी से जनजीवन अस्त-व्यस्त
बक्सर/राजपुर/धनसोई/चक्की : शुक्रवार को आयी आंधी-पानी के बाद फसल की तबाही से किसान उबर भी नहीं पाये थे, तभी सोमवार को फिर मौसम बिगड़ गया और तेज हवा के साथ वर्षा हुई, जिससे किसान बुरी तरह आहत हो गये. चैत महीना में रबी की फसल पक कर पूरी तरह तैयार हो गयी है और किसान झूमते रहते हैं और चैता के गीत गाते रहते हैं, लेकिन लगातार हो रही वर्षा से किसानों की चिंता बढ़ गयी है.
वर्षा के कारण गेहूं, दलहन, चना, मटर जो कट भी गये हैं, उसे बचाने की कवायद में किसान जुट गये हैं. जबकि वर्षा के कारण जलजमाव से प्याज में कुकुरी रोग पकड़ने की संभावना प्रबल हो गयी है. वर्षा के कारण खेतों में जगह-जगह जलजमाव होने से खेत में लगे प्याज को सड़ने का खतरा मंडराने लगा है.
किसानों को भारी नुकसान : राजपुर प्रतिनिधि के अनुसार सोमवार को दोपहर में तेज आंधी और पानी से गेहूं सहित अन्य फसलों को काफी नुकसान हुआ है. वहीं, इन दिनों आम के पेड़ों में छोटे-छोटे लगे टिकोले को भारी नुकसान हुआ है. बहुत से टिकोले गिर गये हैं, जिसकी वजह से आम के पेड़ों पर बहुत कम फल दिखायी दे रहे हैं़ वहीं, लगातार कई दिनों से मौसम के खराब होने से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इन किसानों को मुआवजा देने के लिए भी तैयार नहीं है. इस प्राकृतिक कहर का दंश ङोल रहे लोग इन दिनों काफी मायूस दिखाई दे रहे हैं.
11 हजार का टूटा तार : धनसोई प्रतिनिधि के अनुसार आंधी से धनसोई-इटाढ़ी मुख्य रोड पर चिरैयाटांड़ गांव के पास ग्यारह हजार का तार टूटने के कारण छह घंटे धनसोई क्षेत्र में बिजली गुल रही़ वर्षा रूकने के बाद पावर सब स्टेशन के कर्मियों द्वारा उक्त तार को जोड़ा गयर. इस संबंध में पुरुषोत्तमपुर स्थित पावर सब हाउस में कार्यरत कर्मी मुन्ना सिंह ने बताया कि जैसे ही बैरी ग्रिड से पावर आते ही आपूर्ति बहाल कर दी जायेगी.
सड़कों की बिगड़ी सूरत : चक्की प्रतिनिधि के अनुसार सोमवार को दिन भर रूक-रूक कर हुई बारिश से किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गयी है. इस बेमौसम बारिश ने एक तरफ जहां सड़कों की सूरत बिगाड़ दी है. वहीं, खेतों में पक चुकी फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है.
बिन मौसम बारिश से किसान परेशान : ब्रहमपुर/सिमरी. बिन मौसम हो रही बरसात से किसान काफी परेशान हैं. किसानों की मसूर और खेसारी की फसल कट चुकी है. गेहूं की भी कटाई शुरू है. इस समय हो रही बारिश से कटनी में काफी मुश्किलें आ रही हैं. रूक-रूक कर हो रही बारिश से कटाई का काम एक सप्ताह पीछे हो गया है. वहीं, खलिहान में रखे गये बोङों पानी से भींग गये हैं, जिससे अनाज के सड़ने का डर किसानों को सताने लगा है.
इलाके के किसान पप्पू सिंह, विजेंद्र राय, लक्ष्मण चौबे, सुशील ओझा, महेश यादव, अक्षय यादव आदि ने बताया कि इस बारिश से किसानों को लाखों की क्षति हुई है. वहीं, सिमरी प्रतिनिधि के अनुसार सिमरी प्रखंड में बारिश और तेज हवा के चलते फसलों को भी काफी क्षति पहुंची है, जिससे किसानों की कमर टूट गयी है. वहीं, दूसरी ओर सिमरी प्रखंड में सड़कों की हालत काफी दयनीय हो गयी है, जिससे राहगीरों को काफी परेशानी हो रही है.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डॉ देव करण कहते हैं कि यह वर्षा मात्र डेढ़ मिलीमीटर आंकी गयी है, जो खेतों के लिए प्रभावहीन है, लेकिन दिन के 1.30 बजे 24.6 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आयी तेज आंधी के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ है. करीब एक बजे दिन के बाद हवा की गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार में आयी, जिससे खेतों को काफी नुकसान हुआ है. गेहूं के साथ-साथ दलहन व तेलहन की फसलों को काफी नुकसान हुआ. साथ ही आम,लीची, आंवला, नींबू में लगे मोजर बरबाद हो गये हैं. गरमा की फसल को इस पानी से फायदा हुआ है. साथ ही हवा और पानी के साथ आयी ठंड से मुरगी के चूजों के लिए जीवन बचाना मुश्किल हो गया है. प्याज की खेती को नुकसान हुआ है, लेकिन काफी कम. क्योंकि पानी खेतों में काफी कम जमा हुआ है.
क्या कहते हैं किसान
चुरामनपुर के किसान विनोद कुमार पासवान कहते हैं कि माल गुजारी पर एक एकड़ भूमि में खेती की थी और पंप सेट से पटा कर खेत को बचाया भी था, लेकिन मौसम के कहर से मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है. वहीं, चुरामनपुर के एक अन्य किसान मरकडेय सिंह कुशवाहा कहते हैं कि प्याज की खेती पर एक तरफ चूहों का प्रकोप है. वहीं बिगड़े मौसम के कारण जलजमाव से प्याज के सड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है.
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