18 वर्षो में भी नहीं बना प्रखंड कार्यालय भवन

केसठ : प्रखंड को अस्तित्व में आये 18 वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक उसे अपना भवन नसीब नहीं हो सका. प्रखंड का अपना भवन नहीं होने के कारण प्रखंड कार्यालय किसान भवन में चल रहा है. जून 1995 को नवानगर के तीन पंचायत केसठ, कतिकनार व रामपुर को मिला कर केसठ प्रखंड बनाया […]
केसठ : प्रखंड को अस्तित्व में आये 18 वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक उसे अपना भवन नसीब नहीं हो सका. प्रखंड का अपना भवन नहीं होने के कारण प्रखंड कार्यालय किसान भवन में चल रहा है.
जून 1995 को नवानगर के तीन पंचायत केसठ, कतिकनार व रामपुर को मिला कर केसठ प्रखंड बनाया गया था. प्रखंड बनने के बाद प्रखंडवासियों को विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन सब बेकार साबित हुआ. तीन पंचायतों वाला केसठ प्रखंड कृषि बहुल क्षेत्र है.
* हजारों एकड़ में होती है खेती
तीन पंचायतों वाले उक्त प्रखंड को डुमरांव रजवाहा ही सिंचाई का एक मात्र साधन है. प्रखंड 787 एकड़ में फैला है. कृषि योग्य भूमि 7610. 92 एकड़ है. 80 फीसदी लोगों की जीविका साधन खेती है, लेकिन सरकारी नलकूप व जल संरक्षण की व्यवस्था नहीं होने से किसान सिंचाई के लिए निजी नलकूप के सहारे महंगा डीजल खरीद कर पटवन करते हैं या फिर भगवान भरोसे नहर पर आश्रित रहते है.
* 30 हजार से अधिक जनसंख्या
30 हजार से अधिक जनसंख्या वाले इस प्रखंड में लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं. प्रखंड में छात्रओं के पढ़ने के लिए एक भी हाइस्कूल नही है. यहां पर स्वास्थ्य के नाम पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 18 मध्य विद्यालय, सात प्राथमिक विद्यालय, तीन हाइस्कूल के अलावा 29 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. सुरक्षा के नाम पर एक भी थाना व ओपी नहीं है.
* उधार के भवन में कई कार्यालय
18 वर्षो के बाद भी प्रखंड का अपना भवन नहीं है. अंचल कार्यालय ट्राइसम भवन में चलता है. सीडीपीओ, बीएओ, कल्याण पदाधिकारी, खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, पंचायती राज पदाधिकारी समेत कई कार्यालय उधार के भवन में चलते है. कई विभाग के कार्यालय नहीं है. पूरे प्रखंड में एक भी पंचायत सेवक नहीं है. संविदा आधार पर नियुक्त एक पंचायत सेवक तीनों पंचायतों का कार्य देखता है.
* क्या कहते हैं पूर्व प्रखंड प्रमुख
केसठ प्रखंड के पूर्व प्रमुख अरविंद कुमार गुप्ता कहते हैं कि विगत कई वर्षो से प्रखंड क्षेत्र में नाली-गली, सड़क, शिक्षा समेत कई विकास कार्यो को किया गया, लेकिन क्षेत्र के महादेवगंज पोखरा टोला, जमुआं टोला, किरनी, धनुआंडीह समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीण लालटेन युग में जीने को मजबूर हैं.
* क्या कहते हैं ग्रामीण
प्रखंड क्षेत्र के डॉ जयनाथ उपाध्याय, प्रमोद सिंह, सतीश कुमार द्विवेदी, नरेंद्र प्रताप पांडेय, धनंजय आर्य, मनोज कुमार गुप्ता कहते हैं कि प्रखंड बनने के 18 साल के बाद भी प्रखंड का विकास अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ है. इसमें विकास के लिए जनप्रतिनिधि व अधिकारी को मिल कर विकास की योजना बना कर काम करने से तेजी से विकास हो सकता है.
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