प्रसव के दौरान नवजात की मौत
Updated at : 26 Apr 2018 4:46 AM (IST)
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घटना चौसा पीएचसी में हुई, मामले की जांच सीएस से कराने की मांग चौसा : पीएचसी प्रबंधन की लापरवाही के चलते बक्सर में एक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गयी. मामला चौसा पीएचसी का है, जहां पर चौसा प्रखंड के सोनपा गांव के पप्पू यादव की पत्नी सुमन देवी को […]
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घटना चौसा पीएचसी में हुई, मामले की जांच सीएस से कराने की मांग
चौसा : पीएचसी प्रबंधन की लापरवाही के चलते बक्सर में एक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गयी. मामला चौसा पीएचसी का है, जहां पर चौसा प्रखंड के सोनपा गांव के पप्पू यादव की पत्नी सुमन देवी को प्रसव पीड़ा होने के बाद घरवालों ने उसे मंगलवार की रात चौसा पीएचसी में भर्ती कराया और बुधवार की अहले सुबह नवजात पैदा हुआ जो मृत पाया गया. इसकी सूचना मिलते ही परिजनों ने प्रसव के दरम्यान चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे. पीएचसी में परिजनों को आक्रोशित देख कर अस्पताल प्रबंधन द्वारा पुलिस को बुलानी पड़ी. मौके पर पहुंची पुलिस व अस्पताल प्रबंधन द्वारा काफी समझाने के बाद परिजन शांत हुए. हालांकि परिजनों के द्वारा बक्सर सीएस से उक्त मामले की जांच कराने की मांग की है.
परिजनों ने बताया कि एक तो पीएचसी में एक भी लेडीज डॉक्टर नहीं हैं और पीएचसी में कार्यरत एएनएम द्वारा प्रसव कराया जाता है. इस केस में भी यही हुआ. जब कर्मियों को केस समझ में नहीं आया तो उन्हें रेफर कर देना चाहिए था लेकिन अनुभव के अभाव में प्रसव से पीड़ित महिला को रेफर नहीं किया गया, जिससे नवजात की मौत हो गयी. इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला के पेट में बच्चा मूवमेंट नहीं कर रहा था और उसका सिर फंस गया था. जच्चे को बचाने के लिए एक छोटा ऑपरेशन कर डिलिवरी कराया गया तो बच्चा मृत था जिससे पेट में ही बच्चे की मौत हो गयी थी. डिलिवरी करा अब जच्चे को बचाना बेहद जरूर था. बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की गिरती व्यवस्था का दंश बक्सर वासी झले रहे हैं. आये दिन जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ कुछ ना कुछ घटनाएं घटती हैं. घटना घटने के बाद वरीय अधिकारियों द्वारा जांच के आदेश तो दिये जाते हैं लेकिन आगे चलकर इसमें कुछ होता नहीं है. चौसा सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई नवजात की मौत भी इसी लापरवाही का एक ताजा उदाहरण है. घटना की जानकारी के बाद नाराज परिजनों ने इस पूरे मामले को लापरवाही की संज्ञा दी है. परिजनों ने बताया कि जब माकूल व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में नहीं होती है तो फिर स्वस्थ स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा विभाग क्यों करता है. पिछले दिनों दो सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान नवजातों की मौत का मामला आ चुका है. चौसा सरकारी अस्पताल में नर्स के द्वारा प्रसव कराये जाने की बात सामने आयी है.
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