भरत मिलाप पर भक्त हुए भावविभोर

Updated at : 26 Sep 2017 4:51 AM (IST)
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भरत मिलाप पर भक्त हुए भावविभोर

बक्सर : रामलीला समिति के तत्वावधान में संचालित 21 दिवसीय विजयदशमी महोत्सव के 13वें दिन लीला में दशरथ मरण, भरत मिलाप तथा जयंत पर कृपा की कथा का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया. वहीं, कृष्ण लीला के तहत भक्त नरसी भाग दो का दृश्य प्रस्तुत किया गया. लीला की प्रस्तुति वृंदावन से आये ख्याति प्राप्त […]

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बक्सर : रामलीला समिति के तत्वावधान में संचालित 21 दिवसीय विजयदशमी महोत्सव के 13वें दिन लीला में दशरथ मरण, भरत मिलाप तथा जयंत पर कृपा की कथा का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया. वहीं, कृष्ण लीला के तहत भक्त नरसी भाग दो का दृश्य प्रस्तुत किया गया.
लीला की प्रस्तुति वृंदावन से आये ख्याति प्राप्त श्रीराम-श्याम अनुकरण लीला मंडली द्वारा निर्वाण बाबा के सान्निध्य में किया जा रहा है. दिन में कृष्णलीला एवं रात में रामलीला के तहत रविवार की रात दशरथ मरण एवं भरत मिलाप लीला का मार्मिक मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए दर्शकों की अपार भीड़ जुटी हुई थी. दशरथ मरण एवं भरत मिलाप लीला को देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गये.
दशरथ मरण, भरत मिलाप एवं जयंत पर कृपा का हुआ जीवंत मंचन : राजा दशरथ से आशीर्वाद लेकर भगवान श्रीराम जंगल में चले जाते हैं. 14 दिनों बाद श्रीराम गंगा पार कर जाते हैं. इसके बाद सुमंत जी श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीता जी को छोड़कर वापस आ गये. वापस आने पर राजा दशरथ ने सुमंत जी से श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीता के बारे में पूछते हैं कि वे कहां हैं,
इसपर सुमंत जी ने उनके साथ नहीं आने की बात कहते हैं. इसके साथ ही श्रीराम वटवृक्ष का दुध मंगा कर अपनी बालों की जटा बनायी. इसके बाद केवट को बुलाकर नौका पर सवार होकर जंगल की ओर चले गये. इस बात को सुन राजा दशरथ काफी परेशान व दुखी होते हैं. राम-राम कहते हुए वे मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. अयोध्या में शोक की लहर दौड़ पड़ती है. भरत एवं शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलाया जाता है. अयोध्या आने के बाद शांति एवं पिता दशरथ, श्रीराम, लक्ष्मण एवं भाभी सीता के दरबार में नहीं दिखने पर भरत काफी व्याकुल हो उठे. वे दौड़कर माता कैकई के पास पहुंचते हैं और सभी के बारे में पूछताछ शुरू करते हैं.
माता कैकई भरत को दो वरदानों की कथा सुनाई, जिसके कारण पिता दशरथ के प्राण त्यागने एवं श्रीराम को 14 साल के वनवास पर चले जाने की बात बतायी. भरत को अयोध्या का राजा होने की बात कही. ये बातें सुनकर भरत काफी दुखी हुए और रोते हुए श्रीराम से मिलने की जिद करते हैं. भरत जी सभी प्रवासियों के साथ वन में मिलने के लिए सुमंत जी को साथ लेकर आते हैं. वन में पहुंच भरत श्रीराम, सीता एवं लक्ष्मण से अयोध्या वापस लाने की कोशिश करते हैं. इधर वन गमन के दौरान भगवान श्रीराम का जयंत जी की कृपा प्राप्त होती है.
कृष्णालीला में नरसी भाग दो का हुआ मंचन : कृष्णलीला में नरसी भाग दो का मंचन किया जाता है. कलाकारों की मार्मिक प्रस्तुति से दर्शक द्रवित हो जाते हैं. लीला के तहत नरसी जी की पुत्री रामा की पुत्री नानी बाई की शादी तय होती है. शादी में रामा के ससुरालवाले संदेश भेजते हैं. संदेश पढ़कर नरसी जी काफी दुखी हो जाते हैं. भेजे गये पत्र रूपी संदेश में इमली घोटाई के लिए सामान की एक लंबी लिस्ट जारी की गयी थी. इनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था. जब स्वयं भगवान सावरीया के रूप में ब्राह्मणों के लिए भोजन लेकर आते हैं, तब नरसी जी सभी संतों के साथ तैयारी करके सीरसागढ़ से झुन्नगढ़ के लिए रवाना होते हैं. रास्ते में गाड़ी की पहिया टूट जाते हैं. पहिये को ठीक करने के लिए भगवान स्वयं खातिका रूप में वहां आते हैं और पहिये ठीक कर झुन्नगढ़ के लिए रवाना करते हैं. झुन्नागढ़ पहुंच नरसी भजन करने लगते हैं, तभी वहां भगवान आते हैं और बहन रामा का इमली घोटाई की रस्म पूरा करते हैं.
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