ठेकेदार-मजदूरों को खदेड़ा

Updated at : 09 Aug 2017 6:12 AM (IST)
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ठेकेदार-मजदूरों को खदेड़ा

गुस्सा. कटावरोधी कार्यों में मिट्टी की भराई पर ग्रामीण हुए आक्रोशित अभियंता व ठेकेदारों के साथ मजदूरों को खदेड़ा बक्सर : सदर प्रखंड के मझरियां व उमरपुर गांवों के सामने कटावरोधी कार्यों के बालू भरे बोरे गंगा में विलीन होने के बाद इलाके के ग्रामीण उग्र हो गये हैं. बालू के बदले मिट्टी भरकर कराये […]

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गुस्सा. कटावरोधी कार्यों में मिट्टी की भराई पर ग्रामीण हुए आक्रोशित

अभियंता व ठेकेदारों के साथ मजदूरों को खदेड़ा
बक्सर : सदर प्रखंड के मझरियां व उमरपुर गांवों के सामने कटावरोधी कार्यों के बालू भरे बोरे गंगा में विलीन होने के बाद इलाके के ग्रामीण उग्र हो गये हैं. बालू के बदले मिट्टी भरकर कराये जा रहे बचाव कार्य को ग्रामीणों ने रोक दिया है. आक्रोशित ग्रामीणों ने अभियंता व ठेकेदारों के साथ मजदूरों को भी मानक के अनुरूप कार्य नहीं कराने पर खदेड़ दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष कटावरोधी कार्यों के नाम पर जनता का करोड़ों रुपये पानी में बहाया जा रहा है, लेकिन कटावरोधी कार्यों को जरूरत व मानक के अनुरूप नहीं कराया जा रहा है, जिससे कटाव पर रोक नहीं लग पा रहा है और हर साल किसानों की जमीन गंगा में विलीन हो रही है.
ग्रामीण कटावरोधी कार्य करनेवाली कंस्ट्रक्शन कंपनी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इसी के मद्देनजर मिट्टी से कराये जा रहे कार्यों पर रोक लगा दी गयी है. ग्रामीण रामप्यार सिंह ने बताया कि बक्सर-कोइलवर गंगा तटबंध से सटे गंगा किनारे हो रहे कटावरोधी कार्यों में बड़ा घोटाला किया गया है. इसकी पोल खुल गयी है. कटावरोधी कार्यों की नींव ही कमजोर है. बाढ़ के दौरान गंगा की तेज धार रोकने के लिए लगाये गये बोरे अभी से ही गंगा में बहने लगे हैं. ग्रामीणों को बाढ़ से कटाव की चिंता सताने लगी है.
किनारों पर नहीं रखे बोरे, कटाव का खतरा : बाढ़ के लिए संवेदनशील मझरियां के गंगा किनारे इलाके में जहां नदी की तेज धार आकर टकराती है और फिर यहां से मुड़ती है. यहां कटाव का खतरा सबसे अधिक है. वहां पिछले वर्ष भी कटावरोधी कार्य किये गये थे, जिसका अवशेष अब भी मौजूद है. यहां से कोइलवर-बक्सर तटबंध की दूसरी महज 130 मीटर रह गयी है. इसी के मद्देनजर कटावरोधी कार्यों की स्टीमेट बनायी गयी कि इस क्षेत्र पर कटाव का सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है, लेकिन कार्य के किनारे पर बोरे नहीं डालकर मिट्टी से लीपापोती कर दी गयी है, जिससे कटाव का खतरा बरकरार है. ग्रामीणों ने ठेकेदार व कार्यकारी एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
स्थायी निदान नहीं करना चाहते अधिकारी : मझरियां व उमरपुर में गंगा किनारे कराये गये कटावरोधी कार्यों में बालू डालकर तथा मिट्टी भरने से कोई फायदा नहीं है. इसके पास के गांवों में कार्यस्थल के पूरब और पश्चिम पत्थर के बोल्डर डालकर भरे गये हैं, जो कटाव का स्थायी निदान है. ऐसी परिस्थिति में बालू भरकर कटावरोधी कार्य कराने का कोई औचित्य नहीं था. प्राक्कलन तीन गुणा ज्यादा की राशि का बनाया गया है. अतः नियमानुसार जांच कर कार्रवाई करने पर विभागीय अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आयेंगे. कारण कि बालू भरकर कटावरोधी कार्य कराने में हर साल करोडों की राशि बरबाद हो रही है. ग्रामीणों ने औद्योगिक थाने से भी वित्तीय अनियमितता की जांच कर कार्रवाई की गुहार लगायी थी.
जांच के बाद होगी कार्रवाई
यह संवेदनशील व गंभीर मुद्दा है. बालू से ही कटावरोधी कार्य कराने हैं. यदि विभागीय अधिकारी प्रावधान के विपरीत मिट्टी से मरम्मती कार्य करा रहे हैं, तो इसकी जांच कराने के बाद कार्रवाई होगी.
मुकेश पांडेय, जिलाधिकारी, बक्सर
स्टॉक में नहीं है बालू सैंडिशवाल से मरम्मत
कटाव के मद्देनजर मरम्मती व बचाव कार्य जरूरी है. बालू की जगह सैंडिशवाल (बालू मिश्रित मिट्टी) भरकर मरम्मती कार्य प्रावधान के विपरीत नहीं है. बाढ़ से निबटने के लिए बालू का स्टॉक नहीं रखा गया है, जिसके कारण बालू से कटावरोधी कार्यों की मरम्मती नहीं करायी जा सकती है.
श्याम कुमार यादव, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण
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