राजगीर के यूडीआईडी शिविर में कई डॉक्टर नदारद, सहायकों के भरोसे जांच का आरोप

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राजगीर के अनुमंडलीय अस्पताल में आयोजित यूडीआईडी शिविर में आये बच्चे

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राजगीर के अनुमंडलीय अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी बनाने के लिए लगाए गए शिविर में कई विशेषज्ञ डॉक्टर अनुपस्थित रहे. इससे दिव्यांग बच्चों के परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

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दिव्यांग बच्चों को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से शुक्रवार को राजगीर के अनुमंडलीय अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) बनाने के लिए शिविर लगाया गया. शिविर में 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विभिन्न प्रकार के दिव्यांग बच्चों का प्रखंड स्तर पर यूडीआईडी एवं दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनाने की व्यवस्था की गयी थी.

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शिविर में कुल 60 बच्चों का पंजीकरण कराया गया, जिसमें केवल 30 बच्चों की जांच की गयी. बाकी बच्चों को संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रेफर किया गया है.

कई चिकित्सकों की अनुपस्थिति का आरोप

शिविर के सफल आयोजन एवं संचालन के लिए अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा दिव्यांगता बोर्ड का गठन किया गया था. शिविर में दिव्यांग बच्चों की चिकित्सकीय जांच और प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया पूरी करने के लिए चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति की गयी थी.

प्रभारी उपाधीक्षक द्वारा डॉ. गौरव, शिशु विशेषज्ञ डॉ. स्वेश चंद्र, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमजीत कुमार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. सपना गुप्ता तथा फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नासीर सुलेमान को शिविर में उपस्थित रहकर दिव्यांग बच्चों की जांच एवं यूडीआईडी तथा दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था.

लेकिन सूत्रों के अनुसार, शिविर के दौरान कई प्रतिनियुक्त चिकित्सक मौके पर मौजूद नहीं मिले. परिजनों और लाभुकों को चिकित्सकों की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ा.

कार्यालय और तकनीकी सहायकों की भूमिका पर सवाल

अभिभावकों का कहना है कि चिकित्सकों की अनुपस्थिति में कार्यालय सहायक और तकनीकी सहायक को ही कई स्तर पर चिकित्सकीय भूमिका निभाते देखा गया. इससे शिविर की व्यवस्था और दिव्यांग बच्चों की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

प्रमाण-पत्र से मिलती हैं कई सरकारी सुविधाएं

दिव्यांग बच्चों के लिए प्रमाण-पत्र सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, शिक्षा, पेंशन और अन्य सुविधाओं का आधार है. ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी है.

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