राजगीर में धड़ल्ले से बज रहे पावर हॉर्न, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चालकों में डर नहीं; कार्रवाई पर उठे सवाल
पॉवर हॉर्न के शोर से परेशान लोग (AI Generated)
राजगीर के शांत वातावरण में पावर हॉर्न का शोर लोगों की शांति भंग कर रहा है. पटना हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है. जानिए क्यों जारी है यह समस्या और इसका जनजीवन पर क्या है असर.
High Court Order In Rajgir : राजगीर. शांत वातावरण के लिए मशहूर राजगीर में इन दिनों पावर हॉर्न का शोर लोगों की शांति भंग कर रहा है. पटना हाईकोर्ट के सख्त निर्देश और ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी गाइडलाइन के बावजूद राजगीर में पावर हॉर्न और प्रेशर हॉर्न बजना बंद नहीं हो रहा है. पर्यटन और आध्यात्मिक नगरी की सड़कों पर तेज और कर्कश हॉर्न की आवाज लोगों की परेशानी बढ़ा रही है.
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन पर रोक के बावजूद दोपहिया, चारपहिया वाहनों के साथ बस और ट्रकों में भी पावर हॉर्न लगाए जा रहे हैं. शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से वाहन चालक बेखौफ होकर इनका इस्तेमाल कर रहे हैं.
तेज हॉर्न के बजने से शांत माहौल खराब हो गया है
भगवान बुद्ध और तीर्थंकर महावीर की साधना और कर्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध राजगीर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं. लेकिन शहर की सड़कों पर लगातार बजने वाले तेज हॉर्न ने इस शांत माहौल को खराब करना शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि सड़क पर कुछ ही मिनट के अंतराल में कई बार तेज हॉर्न सुनाई देता है, जिससे आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है.
वाहन चालकों में नियमों का डर नहीं
केंद्रीय पर्यटन सलाहकार डॉ कौलेश कुमार, डॉ अनिल कुमार, सुवेन्द्र राजवंशी, सुधीर कुमार पटेल, आशुतोष कुमार पाण्डेय सहित अन्य स्थानीय नागरिकों ने प्रतिबंधित हॉर्न के इस्तेमाल पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि राजगीर में कई दोपहिया और चारपहिया वाहनों में पावर हॉर्न और प्रेशर हॉर्न लगाए गए हैं. इसके अलावा बस और ट्रक चालक भी तेज आवाज वाले हॉर्न का इस्तेमाल कर रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पावर हॉर्न और प्रेशर हॉर्न पर रोक के बावजूद सड़कों पर इनका इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है. यातायात पुलिस और थाना पुलिस द्वारा नियमित जांच नहीं किए जाने के कारण वाहन चालकों में कार्रवाई का डर नहीं है. लोगों ने आरोप लगाया कि हॉर्न बजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ रही है.
अस्पताल-स्कूल के पास भी तेज आवाज की शिकायत
मोटर वाहन नियमों के तहत तेज आवाज वाले हॉर्न के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं. अस्पताल, विद्यालय, न्यायालय और सरकारी कार्यालयों के आसपास तेज आवाज वाले हॉर्न और अन्य ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले साधनों पर रोक है. नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और अन्य कार्रवाई का प्रावधान है.
इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि राजगीर में संवेदनशील इलाकों के आसपास भी तेज हॉर्न सुनाई देते हैं. लोगों की मांग है कि ऐसे स्थानों को चिन्हित कर नियमित जांच अभियान चलाया जाए और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जाए.
तेज आवाज से स्वास्थ्य पर असर
चिकित्सकों डॉ उमेश चन्द्र, डॉ राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, डॉ बिमलेंद्र कुमार सिन्हा सहित अन्य विशेषज्ञों ने लगातार तेज आवाज को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बताया है. उनके अनुसार 85 डेसीबल से अधिक का शोर लंबे समय तक सुनना स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है.
लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से तनाव, नींद न आना, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा भी रहता है. रात के समय तेज हॉर्न की आवाज लोगों की नींद खराब करती है, जिससे अगले दिन थकान और काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
बच्चों की पढ़ाई पर भी असर
शिक्षाविदों प्रो शिवेन्द्र नारायण सिंह, डॉ राजीव रंजन, डॉ आनन्द प्रकाश गुप्ता, विवेक किशोर, अनन्त कुमार सिन्हा सहित अन्य लोगों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण का असर बच्चों और विद्यार्थियों पर ज्यादा पड़ता है.
अचानक तेज हॉर्न बजने से बच्चों का ध्यान भटकता है और पढ़ाई में एकाग्रता प्रभावित होती है. बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए शांत माहौल जरूरी है. ऐसे में लगातार आने वाली तेज आवाज तनाव और चिंता को बढ़ा सकती है.
पक्षियों-वन्यजीवों पर भी बढ़ा खतरा
राजगीर की पहाड़ियों और जंगलों में रहने वाले पक्षियों और वन्यजीवों को लेकर भी पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि लगातार ध्वनि प्रदूषण से पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार पर असर पड़ सकता है. इससे उनके आने-जाने, खाना खोजने और बच्चे पैदा करने की गतिविधियां भी प्रभावित होने की आशंका है.
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि राजगीर की पहचान उसके प्राकृतिक वातावरण से भी है. ऐसे में शहर में बढ़ता ध्वनि प्रदूषण केवल लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय जैव विविधता के लिए भी चिंता का विषय है.
राजगीर को नो हॉर्न जोन बनाने की मांग
उच्चतम न्यायालय और पटना हाईकोर्ट की ओर से पावर हॉर्न, प्रेशर हॉर्न और डीजे के इस्तेमाल को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं. इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है.
बुद्धिजीवियों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने राजगीर को प्रभावी रूप से नो हॉर्न जोन बनाने की मांग की है. लोगों ने प्रतिबंधित हॉर्न की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के साथ नियमित वाहन जांच अभियान चलाने की मांग की है.
डीजे के खिलाफ ठीक से कार्रवाई नहीं हो रही
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि यातायात और थाना पुलिस की ओर से पावर हॉर्न, प्रेशर हॉर्न और तय समय के बाद बजने वाले डीजे के खिलाफ ठीक से कार्रवाई नहीं की जा रही है. लोगों का कहना है कि जब तक सड़क पर नियमित जांच और जुर्माने की कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नियमों का उल्लंघन जारी रहेगा.
राजगीर की पहचान एक शांत पर्यटन और आध्यात्मिक नगरी के रूप में है. ऐसे में लोगों की मांग है कि प्रशासन और पुलिस गंभीरता से कदम उठाएं, ताकि तेज हॉर्न और दूसरे ध्वनि प्रदूषण से शहर को राहत मिल सके और राजगीर की शांत वातावरण वाली पहचान बनी रहे.
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