राजगीर में अब होटल नहीं, जंगल के बीच कॉटेज में ठहरेंगे सैलानी, इको-रिसॉर्ट की तैयारी तेज
राजगीर की तस्वीर
राजगीर में जंगल के बीच इको-फ्रेंडली कॉटेज विकसित हो रहे हैं। यह परियोजना 250 पर्यटकों के लिए प्रकृति के करीब ठहरने का अनूठा अनुभव प्रदान करेगी।
Rajgir Nature Safari: बिहार में पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना चुके राजगीर में पर्यटकों को अब प्रकृति के बीच ठहरने का नया अनुभव देने की तैयारी है. वन विभाग की ओर से राजगीर में इको-फ्रेंडली कॉटेज विकसित करने की परियोजना पर काम शुरू किया गया है. सरकारी रिकॉर्ड में इस परियोजना के लिए ई-निविदा जारी होने की जानकारी दर्ज है.
प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य पर्यटकों के लिए प्राकृतिक वातावरण के बीच ठहरने की सुविधा विकसित करना है. मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5.2 एकड़ क्षेत्र में बनने वाली इस योजना में लगभग 250 पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था का प्रस्ताव है. साथ ही 46 कर्मियों के लिए आवास की व्यवस्था भी प्रस्तावित बतायी गयी थी. परियोजना की अंतिम स्वीकृति उस समय लंबित थी.
जंगल के बीच मिलेगा कॉटेज में ठहरने का अनुभव
राजगीर पहले से ही नेचर सफारी, जू सफारी, ग्लास ब्रिज और पहाड़ियों के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. ऐसे में जंगल और प्राकृतिक परिवेश के बीच इको-फ्रेंडली कॉटेज की सुविधा विकसित होने से यहां आने वाले सैलानियों को पारंपरिक होटल से अलग ठहरने का विकल्प मिल सकेगा.
राजगीर नेचर सफारी में पहले से ही लकड़ी, बांस और मिट्टी से बने कॉटेज की सुविधा उपलब्ध है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इन कॉटेज में पर्यटकों को प्रकृति के बीच ठहरने का अनुभव मिलता है.
250 पर्यटकों के ठहरने की प्रस्तावित व्यवस्था
मार्च में सामने आयी परियोजना की रूपरेखा के अनुसार, इको-कॉटेज परियोजना करीब 5.2 एकड़ में विकसित की जानी है. इसमें करीब 250 पर्यटकों के ठहरने की क्षमता प्रस्तावित है. इसके अलावा कर्मचारियों के लिए भी आवासीय सुविधा विकसित करने की योजना बतायी गयी थी.
वन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में जून-जुलाई 2026 में राजगीर में इको-फ्रेंडली कॉटेज के निर्माण से संबंधित निविदा प्रक्रिया दर्ज है. इससे परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया की पुष्टि होती है.
नेचर टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
राजगीर में पहले से संचालित नेचर सफारी में पर्यटकों के लिए कॉटेज, कैफेटेरिया, ई-शटल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नेचर सफारी करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में राजगीर-जठियन मार्ग के बीच वन क्षेत्र में स्थित है.
नई इको-कॉटेज परियोजना को इसी व्यापक प्राकृतिक पर्यटन ढांचे के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है. इससे राजगीर में पर्यटकों के ठहरने के विकल्प बढ़ने के साथ इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
पर्यटन विकास की योजनाओं पर भी जोर
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में नालंदा और राजगीर के पर्यटन विकास से संबंधित जानकारी देते हुए बताया था कि पर्यटन स्थलों के विकास में राज्य सरकार की प्रमुख भूमिका है और केंद्र की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को सहयोग दिया जाता है.
राजगीर में इको-फ्रेंडली कॉटेज की यह परियोजना पूरी होने के बाद पर्यटकों को प्रकृति के करीब ठहरने का नया विकल्प मिलने की संभावना है. हालांकि, परियोजना की पूर्णता और पर्यटकों के लिए संचालन शुरू होने की तारीख अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आयी है.
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