बालू घाटों की नीलामी के लिए नया नियम, नालंदा में 3 मीटर से ज्यादा गहराई में नहीं कर सकेंगे खनन, 5 साल के लिए होगी बंदोबस्ती
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Nalanda Sand Ghat Settlement : नालंदा जिले में बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए ई-टेंडरिंग और ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जानिए क्या हैं नए नियम, पांच साल के लिए बंदोबस्ती और बोली प्रक्रिया के बारे में.
Nalanda Sand Ghat Settlement : नालंदा जिले में बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए ई-टेंडरिंग सह ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनायी जायेगी. खान एवं भू-तत्व विभाग के संशोधित निविदा दस्तावेज के अनुसार तकनीकी जांच में योग्य पाये जाने वाले व्यक्ति, समिति, फर्म, कंपनी या ज्वाइंट वेंचर को ही ई-नीलामी में भाग लेने का मौका मिलेगा.
सबसे अधिक बोली लगाने वाला होगा सफल
बालू घाटों की नीलामी ऑनलाइन ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से होगी. तकनीकी रूप से योग्य निविदादाताओं के बीच ई-नीलामी करायी जायेगी और सबसे अधिक बोली लगाने वाले को सफल निविदादाता माना जायेगा. नीलामी प्रक्रिया में बोलीदाताओं की पहचान गोपनीय रखी जायेगी.
आखिरी पांच मिनट में बोली पर बढ़ेगा समय
ई-नीलामी के अंतिम पांच मिनट में यदि कोई नई बोली आती है, तो सिस्टम नीलामी की अवधि स्वतः बढ़ायेगा. यह अवधि अधिकतम एक घंटे तक बढ़ायी जा सकेगी. इसका उद्देश्य अंतिम समय में आने वाली बोलियों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत शामिल करना है.
पांच साल के लिए होगी बालू घाटों की बंदोबस्ती
सफल बोलीदाता को बालू घाट का बंदोबस्ती अधिकार पांच वर्ष के लिए दिया जायेगा. पहले वर्ष की बंदोबस्ती राशि ई-नीलामी में लगायी गयी सफल बोली के आधार पर तय होगी. दूसरे वर्ष से बंदोबस्ती राशि पिछले वर्ष की राशि की 120 प्रतिशत होगी.
पांच दिन में जमा करनी होगी 25 प्रतिशत राशि
सफल बोलीदाता को नीलामी के पांच दिनों के भीतर नीलामी राशि का 25 प्रतिशत प्रतिभूति के रूप में जमा करना होगा. इसके साथ आवश्यक दस्तावेज भी निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करने होंगे. ऑनलाइन भुगतान संबंधित व्यक्ति, फर्म, कंपनी या अधिकृत निदेशक अथवा साझेदार के बैंक खाते से ही स्वीकार किया जायेगा.
मंजूरी के बाद ही शुरू होगा बालू खनन
नीलामी में सफल होने के बाद भी तत्काल बालू खनन शुरू नहीं किया जा सकेगा. खनन शुरू करने से पहले सफल बोलीदाता को वैधानिक अनुमति, खनन योजना, पर्यावरणीय स्वीकृति और जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक सहमति प्राप्त करनी होगी. निर्धारित अनुमति लेने में देरी होने पर जुर्माने का भी प्रावधान है.
नदी तल में तीन मीटर से अधिक गहराई तक खनन नहीं
नियमों के अनुसार नदी तल में बिना खुदाई वाले तल स्तर से अधिकतम तीन मीटर या जलस्तर, जो भी कम हो, उससे अधिक गहराई तक खनन नहीं किया जा सकेगा. यदि जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में किसी बालू घाट के लिए इससे अलग अधिकतम गहराई निर्धारित की गयी है, तो उसी सीमा का पालन करना होगा.
बालू की बिक्री भी ऑनलाइन करनी होगी
बंदोबस्तधारी को उपभोक्ताओं को बालू की बिक्री ऑनलाइन माध्यम से करनी होगी. विभागीय पोर्टल या मोबाइल ऐप पर प्रतिदिन खनन और भंडारण से संबंधित विवरण अपडेट करना अनिवार्य होगा. नियमों के तहत ई-चालान व्यवस्था के माध्यम से बिक्री और परिवहन की निगरानी की जायेगी.
नियम तोड़ने पर बंद हो सकता है ई-चालान
निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने पर ई-चालान बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है. निविदा की शर्तों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. विभाग की ओर से बालू खनन, बिक्री और परिवहन की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया है.
साइन बोर्ड नहीं लगाने पर एक लाख का जुर्माना
बंदोबस्त क्षेत्र में निर्धारित साइन बोर्ड नहीं लगाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, भू-निर्देशांक के साथ सीमा स्तंभ चिह्नित नहीं करने पर पांच लाख रुपये तक का दंड निर्धारित किया गया है. इससे बालू घाट की सीमा और संचालन क्षेत्र को स्पष्ट रखने की व्यवस्था की गयी है.
अवैध खनन पर भी होगी कार्रवाई
अवैध खनन, बालू के अवैध परिवहन और भंडारण के मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. नई बंदोबस्ती प्रक्रिया में खनन से पहले जरूरी स्वीकृतियों से लेकर ऑनलाइन बिक्री और दैनिक रिकॉर्ड अपडेट करने तक कई शर्तें निर्धारित की गयी हैं.
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