झारखंड के SIR अभियान का नालंदा में असर, 2003 की मतदाता सूची खोजने निर्वाचन कार्यालय पहुंच रहे लोग

Author Kanchan kumar|Edited by Yuvraj Ratan
Updated:
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नालंदा समाहरणालय की तस्वीर

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Biharsharif News : पड़ोसी राज्य झारखंड में चल रहे विशेष अभियान का असर अब नालंदा जिले में भी दिख रहा है. लोग पुराने मतदाता रिकॉर्ड, खासकर 2003 की मतदाता सूची की तलाश में जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंच रहे हैं. यह मांग सीमावर्ती जिलों में भी बढ़ी है.

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Biharsharif News : पड़ोसी राज्य झारखंड में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान का असर अब नालंदा जिले में भी देखने को मिल रहा है. पुराने मतदाता रिकॉर्ड की आवश्यकता के कारण बड़ी संख्या में लोग जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंच रहे हैं. कार्यालय सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन कार्यालय अवधि में औसतन तीन से पांच लोग वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना या अपने परिजनों का नाम खोजने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

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ऑनलाइन और पुराने अभिलेखों से की जा रही नाम की जांच

निर्वाचन कार्यालय के कर्मियों ने बताया कि अधिकांश आवेदकों को वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है. हालांकि कई मामलों में पुराने अभिलेखों की जांच करनी पड़ रही है. ऐसे मामलों में लोगों को आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

माया देवी को नहीं मिला वर्ष 2003 की सूची में नाम

सोहसराय के बूथ संख्या-17 की निवासी माया देवी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2003 में मतदान किया था, लेकिन उपलब्ध मतदाता सूची में उनका नाम नहीं मिल रहा है. इसके कारण उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सेवानिवृत्त बैंककर्मी भी लगा रहे कार्यालय के चक्कर

बिहारशरीफ निवासी सेवानिवृत्त बैंककर्मी अनिल कुमार ने बताया कि उनका नाम भी वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है. उनका पुत्र वर्तमान में झारखंड में नौकरी करता है, जहां SIR अभियान के तहत उनके पिता के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की मांग की गई है. इसी वजह से वे लगातार जिला निर्वाचन कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं.

पुत्र का नाम जुड़वाने के लिए पुराने रिकॉर्ड की तलाश

बिहारशरीफ निवासी रामजी महतो अपने पुत्र का नाम झारखंड के रांची की मतदाता सूची में दर्ज कराना चाहते हैं. इसके लिए उनसे वर्ष 2003 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड मांगा गया है. आवश्यक दस्तावेज जुटाने के लिए उन्हें कभी बूथ स्तर पर तो कभी अनुमंडल निर्वाचन कार्यालय जाना पड़ रहा है.

निर्वाचन कार्यालय ने लोगों से की अपील

निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि जिन लोगों को वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित जानकारी चाहिए, वे अपने पहचान संबंधी आवश्यक विवरण के साथ कार्यालय आएं. जहां संभव होगा, उन्हें ऑनलाइन अथवा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.

सीमावर्ती जिलों में बढ़ी पुराने रिकॉर्ड की मांग

झारखंड में चल रहे SIR अभियान का प्रभाव अब नालंदा सहित सीमावर्ती जिलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. पुराने मतदाता रिकॉर्ड की आवश्यकता बढ़ने के कारण जिला एवं अनुमंडल निर्वाचन कार्यालयों में ऐसे अभिलेखों की मांग अचानक बढ़ गई है. इससे निर्वाचन कार्यालयों में लोगों की आवाजाही भी पहले की तुलना में अधिक हो गई है.

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