बिहारशरीफ में जगदेव प्रसाद का 52वां शहादत दिवस, 5 सितंबर 1974 को हुए थे शहीद, जानिए संघर्ष की कहानी
जगदेव प्रसाद फाइल फोटो
Jagdeo Prasad 52nd Martyrdom Day : सम्राट अशोक जागृति मंच द्वारा जगदेव प्रसाद का 52वां शहादत दिवस मनाया गया. वक्ताओं ने उनके सामाजिक विषमता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष को याद किया. 5 सितंबर 1974 को पुलिस गोलीबारी में शहीद हुए जगदेव प्रसाद आज भी प्रेरणास्रोत हैं.
Jagdeo Prasad 52nd Martyrdom Day : बिहारशरीफ स्थित जगदेव चौक पर शनिवार को सम्राट अशोक जागृति मंच के तत्वावधान में शोषितों के ध्वजवाहक अमर शहीद जगदेव प्रसाद का 52वां शहादत दिवस समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष शिवकुमार कुशवाहा ने की. इस दौरान वक्ताओं ने जगदेव प्रसाद के संघर्ष, विचार और सामाजिक योगदान को याद किया.
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सामाजिक विषमता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष को किया याद
युवा जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संतोष कुशवाहा ने कहा कि जगदेव प्रसाद ने अपना पूरा जीवन सामाजिक विषमता, सामंती शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष में समर्पित कर दिया. उन्होंने समान शिक्षा व्यवस्था और समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ने का समान अवसर देने की वकालत की थी.
सामाजिक क्रांति को बताया परिवर्तन का आधार
डॉ. संतोष कुशवाहा ने कहा कि जगदेव प्रसाद का मानना था कि सामाजिक क्रांति के बिना आर्थिक क्रांति संभव नहीं है. वहीं स्नातक अधिकार मंच के संयोजक डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि जगदेव प्रसाद बहुजनों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई के प्रखर योद्धा थे. उन्होंने शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम माना.
समान शिक्षा और वंचित वर्गों को अवसर देने पर जोर
समारोह में वक्ताओं ने जगदेव प्रसाद के विचारों को दोहराते हुए कहा कि देश में सभी के लिए समान शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने के लिए विशेष अवसर मिलना चाहिए. वक्ताओं ने कहा कि जगदेव प्रसाद ने सामाजिक न्याय और बराबरी के लिए संघर्ष को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया.
युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत
वक्ताओं ने कहा कि जगदेव प्रसाद का जीवन आज भी युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है. उनके विचारों को समाज में आगे बढ़ाने और सामाजिक बराबरी के लिए काम करने का संकल्प भी लिया गया.
5 सितंबर 1974 को पुलिस की गोलीबारी में हुए थे शहीद
गौरतलब है कि 5 सितंबर 1974 को कुर्था प्रखंड मुख्यालय में आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में जगदेव प्रसाद शहीद हो गए थे. उनके साथ छात्र लक्ष्मण चौधरी की भी मौत हुई थी. हर वर्ष उनके शहादत दिवस पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर उनके संघर्ष और विचारों को याद किया जाता है.
समारोह में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंच के सचिव सच्चिदानंद प्रसाद वर्मा, कोषाध्यक्ष संजय मेहता, प्रकाश प्रसाद, धीरज गोस्वामी, राजनंदन मौर्य, चोरसुआ पंचायत के मुखिया चंदन कुमार, पचौरी पंचायत के मुखिया चंद्रदीप कुशवाहा, पूर्व सरपंच दशरथ प्रसाद, संजय कुमार, पंचायत समिति सदस्य इंद्रजीत कुशवाहा, प्रतिभा रानी, उदय कुशवाहा, आलोक कुशवाहा और दिनेश कुशवाहा समेत दर्जनों लोग मौजूद थे.
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