दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय बनने से सशक्त होगी भारतीय साहित्यिक चेतना : नीरज कुमार

Author Ramvilas prasad|Edited by Rajeev Kumar
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दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय बनने से सशक्त होगी भारतीय साहित्यिक चेतना : नीरज कुमार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार सीएम की घोषणाओं से साहित्य जगत में खुशी की लहर है. बेगूसराय में दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना से राष्ट्रकवि की विरासत को नया आयाम मिलेगा और भारतीय साहित्यिक चेतना सशक्त होगी.

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Biharsharif News : देश के राजनीतिक और बौद्धिक विमर्श में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' को मिली नई प्रतिष्ठा पर साहित्य जगत में उत्साह का माहौल है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के "भारत को सही मायने में जानना है तो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' को पढ़ना होगा" वाले वक्तव्य और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा बेगूसराय में दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा का राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास ने स्वागत किया है. न्यास ने इसे हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है.

राष्ट्रकवि की विरासत को मिलेगा नया आयाम

न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और वैचारिक अस्मिता के प्रतीक हैं. उनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और मानवीय मूल्यों का अद्भुत समन्वय मिलता है. उनकी कृतियां आज भी नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देती हैं.

शोध और अध्ययन को मिलेगी नई दिशा

उन्होंने कहा कि दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना से उनके साहित्य, दर्शन और विचारों पर उच्चस्तरीय अध्ययन एवं शोध को नई दिशा मिलेगी. साथ ही देश-विदेश के शोधार्थियों को भारतीय साहित्य और संस्कृति के गंभीर अध्ययन का एक सशक्त केंद्र मिलेगा. यह पहल राष्ट्रकवि की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी.

सरकार से दीर्घकालिक योजनाओं की मांग

नीरज कुमार ने केंद्र और राज्य सरकार से दिनकर के साहित्य के व्यापक प्रचार-प्रसार, शोध और संरक्षण के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक योजनाएं लागू करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रकवि की राष्ट्रीय चेतना और मानवीय विचारधारा आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी. इस अवसर पर शांतिनिकेतन के प्रो. सुभाषचंद्र राय, प्रो. शिवेंद्र नारायण सिंह, प्रो. श्रीकांत सिंह, न्यास सचिव परीक्षित नारायण सुरेश सहित अन्य साहित्यकारों ने भी मुख्यमंत्री की घोषणा और केंद्रीय गृह मंत्री के वक्तव्य का स्वागत करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की.


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