12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, नालंदा में 40 हजार बैंक ऋण मामलों का होगा निस्तारण, 856 वादों की प्री-सिटिंग पूरी
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Nalanda National Lok Adalat : नालंदा में 12 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियां जोरों पर हैं. जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने बैंकों के साथ बैठक कर 40 हजार बैंक ऋण मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा है. 856 वादों की प्री-सिटिंग पूरी हो चुकी है, जहाँ आपसी सहमति से समाधान पर जोर दिया जा रहा है.
Nalanda National Lok Adalat : आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, नालंदा की ओर से बिहारशरीफ में बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गयी. बैठक की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राजेश कुमार गौरव ने की.
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बैठक में बिहारशरीफ और राजगीर अनुमंडल के अधीन कार्यरत विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इसमें पंजाब नेशनल बैंक के एलडीएम के साथ भारतीय स्टेट बैंक, बिहार ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ महाराष्ट्र समेत विभिन्न बैंकों के प्रबंधक शामिल हुए.
40 हजार बैंक ऋण मामले निस्तारण के लिए चिह्नित
बैठक में बैंकों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर बैंक ऋण से संबंधित करीब 40 हजार मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण के लिए चिह्नित किया गया है. चिह्नित मामलों में संबंधित पक्षकारों को नोटिस भी किया जा चुका है.
इसके अलावा कुल 856 वादों में प्री-सिटिंग करायी जा चुकी है. प्री-सिटिंग के माध्यम से पक्षकारों और संबंधित बैंक के बीच मामले के समाधान की संभावनाओं पर बातचीत की जा रही है.
बैंक प्रबंधकों को तेजी से कार्रवाई का निर्देश
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राजेश कुमार गौरव ने सभी बैंक प्रबंधकों को राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए तत्परता से काम करने का निर्देश दिया. उन्होंने अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन की दिशा में लगातार प्रयास करने को कहा.
उन्होंने निर्देश दिया कि मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में बैंक लगातार प्रयास करें और प्रत्येक दिन की प्रगति रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकार को उपलब्ध करायी जाए.
आपसी सहमति से मामलों के समाधान पर जोर
सचिव राजेश कुमार गौरव ने कहा कि पक्षकारों और बैंकों के बीच आपसी सहमति के आधार पर अधिक से अधिक ऋण संबंधी मामलों का समाधान राष्ट्रीय लोक अदालत में कराया जाना चाहिए. इससे लोगों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सकती है.
बैठक में बैंक अधिकारियों को चिह्नित मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये गये. जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण को लेकर तैयारियां तेज कर दी गयी हैं.
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