शहर में खुले नाले दे रहे मौत को दावत
Author Prabhat khabar digital desk
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आरा नगर निगम क्षेत्र में खुले नाले मौत को आमंत्रण दे रहे हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन आंखें बंद कर शांत बैठा है. अभी शनिवार को ही शहर के नगर थाना क्षेत्र के डीसटैंक रोड के पास नाले में गिर कर एक चार वर्षीय बच्चे की मौत हो गयी थी. हादसे का कारण नाले पर […]
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आरा नगर निगम क्षेत्र में खुले नाले मौत को आमंत्रण दे रहे हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन आंखें बंद कर शांत बैठा है. अभी शनिवार को ही शहर के नगर थाना क्षेत्र के डीसटैंक रोड के पास नाले में गिर कर एक चार वर्षीय बच्चे की मौत हो गयी थी. हादसे का कारण नाले पर दो स्लैबों के बीच गैप था. लेकिन शहर में कई ऐसे नाले हैं, जहां स्लैब है ही नहीं.
आपके शहर में
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रिंकू प्रसाद के बेटे हर्ष की नाले में गिरकर हुई मौत के बाद भी नगर निगम सजग नहीं है. इससे शहरवासियों में आक्रोश है. ऐसा नहीं है कि नगर निगम शहर के विकास पर राशि खर्च नहीं करता लेकिन विकास के नाम पर देखें तो शहर में कचरे का ढेर है ही और नालों की स्थिति क्या है उसे आप इस रिपोर्ट से देख कसते हैं.
शहर के पकड़ी चौक से नाला मोड़ पर खुला यह नाला लगभग चार साल पहले बनाया गया था. अपने निर्माणकाल से ही यह खुला है, जिससे हादसे का डर लोगों को सतता है. इसकी चौड़ाई लगभग तीन फुट है और गहराई चार फुट है. जहां यह नाला है वह काफी व्यस्त इलाका है.
शहर के जज कोठी मोड़ पर जर्जर मैनहोल का ढक्कन करीब दो वर्षों से अधिक समय से टूटा हुआ है लेकिन इसे देखनेवाला कोई नहीं है. यह जगह तीखा मोड़ है, जिससे यहां हादसे का ज्यादा डर बना रहता है. इस रास्ते से प्रति��िन हजारों लोग आते-जाते हैं.
क्या कहते हैं नगर आयुक्त
अभी लोकसभा निर्वाचन को लेकर चुनाव आचार संहिता लागू है. निगम में बोर्ड गवर्निंग बॉडी है. लोकसभा चुनाव के बाद बोर्ड की बैठक में इस पर निर्णय लिया जायेगा. बच्चे की मौत से हमलोग भी काफी दुखी हैं. यह गंभीर समस्या है. निगम द्वारा लोगों की सुविधा के लिए काम किया जायेगा.
धीरेंद्र पासवान, नगर आयुक्त
लगभग पौने चार अरब का होता है आरा नगर निगम का बजट
नगर के विकास के लिए निगम द्वारा प्रतिवर्ष चार अरब का बजट बनाया जाता है. इसमें नालों के निर्माण पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं. पर हालात ढाक के तीन पात की तरह ही रह जाते हैं.
नगर निगम का दर्जा पाने के बाद भी खुले नाले का होना नगर के लिए विकास के नाम पर धब्बा है. नगरवासियों को वर्षों से व्यवस्थित और ढके नालों का इंतजार है. ताकि दुर्घटना से तो मुक्ति मिल ही सके व दुर्गंध और गंदगी से भी मुक्ति मिल सके.
12 वर्ष बाद भी अंडर ग्राउंड नालों का नहीं हुआ निर्माण
12 वर्ष पहले आरा नगर निगम का दर्जा दिया गया था ताकि नगर का समुचित विकास हो सके व नगरवासियों को सुविधा हो सके. इतना ही नहीं केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना की शुरुआती दौर में आरा को भी योजना में शामिल किया गया था लेकिन निगम की लापरवाही के कारण अभी तक अधिकांश नाले खुले हैं.
इनको पाटा नहीं गया है. नालों के खुला रहने से एक तरफ रोगजनित मच्छर काफी संख्या में पैदा होते हैं तो दूसरी तरफ लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. खुले नाले के कारण 13 अप्रैल को डीसटैंक रोड के पास चार वर्षीय बच्चे की नाले में गिरकर मौत हो गयी थी. वहीं बाइकचालक आये दिन गिरकर जख्मी होते हैं.
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