सुलतानगंज-अगुवानी पुल पर गंगा का कहर, अब नाव से पहुंचे चोर; काट ले गये लाखों का सरिया, बढ़ी नई मुश्किल
चोर काट ले गये लाखों का सरिया
सुलतानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल परियोजना एक बार फिर मुश्किलों में घिर गई है. गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच अब चोरों ने निर्माणाधीन पुल के बीच सेंध लगाकर निर्माण एजेंसी की चुनौती बढ़ा दी है. करीब एक लाख रुपये के सरिये की चोरी से परियोजना के समय पर असर पड़ सकता है.
सुलतानगंज. उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी सुलतानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल परियोजना एक बार फिर मुश्किल में है. करीब 1,710 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर पहले से ही गंगा के बढ़ते जलस्तर ने ब्रेक लगा रखा है. अब निर्माणाधीन पुल के बीच गंगा में चोरों ने सेंध लगाकर निर्माण एजेंसी की चुनौती और बढ़ा दी है.
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नदी के बीच नाव से पहुंचे चोर निर्माणाधीन पाया संख्या 10 के पास बने डॉल्फिन ऑब्जर्वेटरी स्ट्रक्चर से भारी मात्रा में सरिया काटकर ले गये. चोरी से एजेंसी को करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है. लेकिन असली चिंता सिर्फ चोरी हुए सरिये की कीमत नहीं है. जिस हिस्से से सरिया काटा गया है, उसे दोबारा तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत करना होगा. यानी घटना से पुल निर्माण के समय पर भी असर पड़ सकता है.
20 दिनों से गंगा के बीच बंद पड़ा है काम
सुलतानगंज-अगुवानी पुल का निर्माण गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 20 दिनों से प्रभावित है. नदी के बीच में निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है. किनारे के कुछ हिस्सों में सीमित काम चल रहा था, लेकिन पानी बढ़ने के बाद वहां भी काम प्रभावित हुआ है.
निर्माण स्थल के बीच गंगा में पानी का दबाव और तेज बहाव होने के कारण फिलहाल मशीनों और मजदूरों को नदी के बीच उतारना संभव नहीं है. इसी दौरान निर्माणाधीन हिस्सा सुनसान पड़ा था. चोरों ने इसी स्थिति का फायदा उठाया.
नाव से पहुंचे चोर, सरिया काटकर ले गये
बताया गया कि चोर नाव के सहारे नदी के बीच निर्माणाधीन पाया संख्या 10 के पास पहुंचे. यहां डॉल्फिन ऑब्जर्वेटरी के लिए विशेष स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है.
चोरों ने इसी स्ट्रक्चर में लगे सरिये को काट दिया और नाव के जरिये वहां से निकल गये. बीच गंगा में हुई इस चोरी की जानकारी मिलने के बाद निर्माण एजेंसी में हड़कंप मच गया.
डॉल्फिन ऑब्जर्वेटरी स्ट्रक्चर पुल की परियोजना का एक विशेष हिस्सा है. इसका उद्देश्य गंगा में डॉल्फिन को पुल से देखने के लिए एक निर्धारित संरचना तैयार करना है. ऐसे में इस हिस्से में लगे सरिये की चोरी निर्माण सामग्री के नुकसान के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता और मजबूती से भी जुड़ा मामला बन गयी है.
एक लाख की चोरी से ज्यादा बड़ी है तकनीकी चुनौती
निर्माण एजेंसी के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि काटे गये सरिये की जगह सिर्फ नया सरिया लगाना पर्याप्त नहीं होगा. संबंधित हिस्से की तकनीकी जांच के बाद उसे निर्धारित मानकों के अनुसार फिर से मजबूत करना पड़ेगा.
इस पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है. पहले ही गंगा के जलस्तर के कारण निर्माण की रफ्तार प्रभावित है. अब चोरी के बाद दोबारा काम शुरू होने पर इस हिस्से को दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी करनी होगी.
यानी नुकसान का आकलन सिर्फ एक लाख रुपये की सामग्री से नहीं किया जा सकता. चोरी के कारण लगने वाला अतिरिक्त समय भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है.
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
निर्माणाधीन पुल का बड़ा हिस्सा नदी के बीच है. सामान्य स्थिति में यहां मजदूरों और निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों की आवाजाही रहती है. लेकिन काम बंद होने के कारण निर्माण स्थल अपेक्षाकृत सुनसान हो गया था.
ऐसे में सवाल यह भी है कि नाव के जरिये चोर नदी के बीच निर्माण स्थल तक कैसे पहुंचे और वहां सरिया काटकर वापस कैसे निकल गये.
घटना के बाद निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का फैसला लिया है. प्रोजेक्ट मैनेजर रविशंकर सिंह ने बताया कि नाव के माध्यम से पहुंचकर सरिया काटे जाने की जानकारी मिली है. इसके बाद सुरक्षा कर्मियों को सतर्क रहने और निर्माण स्थल के साथ सामग्री की निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है.
पानी घटने का इंतजार, फिर तेज होगा निर्माण
प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार, गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण फिलहाल नदी के बीच निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है. कंपनी निर्माण सामग्री को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी है.
एजेंसी का कहना है कि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जायेगा. जलस्तर कम होते ही नदी के बीच निर्माण कार्य को फिर से गति देने की तैयारी है.
इससे साफ है कि फिलहाल परियोजना की रफ्तार काफी हद तक गंगा के जलस्तर पर निर्भर है. पानी कम होने के बाद निर्माण एजेंसी को पहले चोरी से प्रभावित हिस्से की तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करनी होगी और फिर निर्माण को तेज करना होगा.
11 साल से इंतजार कर रहा है यह पुल
सुलतानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल परियोजना के लिए मुश्किलें कोई नई बात नहीं हैं. करीब 1,710 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2015 से हादसों और तकनीकी चुनौतियों का सामना करती रही है.
करीब 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2026 में निर्माण कार्य ने दोबारा रफ्तार पकड़ी थी. ऐसे में गंगा का बढ़ता जलस्तर और अब निर्माणाधीन हिस्से में चोरी परियोजना के सामने नई चुनौती बनकर सामने आयी है.
पुल पूरा हुआ तो लाखों लोगों को मिलेगी राहत
सुलतानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है. इसके पूरा होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सीधा फोरलेन संपर्क स्थापित होगा.
भागलपुर, खगड़िया, मुंगेर, बेगूसराय और कोसी-सीमांचल के लाखों लोगों के लिए इस पुल की बड़ी उपयोगिता है. पुल चालू होने के बाद विक्रमशिला पुल पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है.
आवागमन का समय घटेगा और व्यापार तथा उद्योग को भी गति मिलने की संभावना है. यही वजह है कि लंबे समय से इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है.
फिलहाल चुनौती दोहरी है. एक तरफ गंगा का बढ़ता पानी निर्माण की रफ्तार रोक रहा है, तो दूसरी तरफ निर्माण स्थल की सुरक्षा को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है. अब निगाह इस बात पर है कि जलस्तर कब सामान्य होता है और उसके बाद एजेंसी प्रभावित हिस्से को कितनी तेजी से तकनीकी मानकों के अनुरूप मजबूत कर निर्माण को आगे बढ़ाती है.
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