भागलपुर में बाढ़ के पानी में घुटनों तक उतरीं बहनें, भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए तय किया डूबा रास्ता
भागलपुर में बाढ़ के बीच बहनों ने घुटनों तक पानी पार कर बांधी राखी
भागलपुर में गंगा के उफान के बीच रक्षाबंधन की एक दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई. घुटनों तक पानी में चलकर बहनें अपने भाइयों के घर पहुंचीं, ताकि कलाई सूनी न रहे. यह दृश्य भाई-बहन के अटूट रिश्ते की मिसाल है.
Bhagalpur Flood Raksha Bandhan: भागलपुर में गंगा के उफान के बीच रक्षाबंधन की ऐसी तस्वीर सामने आयी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया. चारों तरफ पानी था, रास्ते डूबे थे, लेकिन बहनों के कदम नहीं रुके. हाथ में राखी लिये वे घुटनेभर से अधिक पानी में उतरीं और भाई के घर पहुंचीं. मकसद सिर्फ एक था, रक्षाबंधन पर भाई की कलाई सूनी नहीं रहनी चाहिए.
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एक तरफ गंगा का बढ़ता पानी था और दूसरी तरफ भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट. भागलपुर के निचले इलाकों में शुक्रवार को रक्षाबंधन पर यह भावुक तस्वीर देखने को मिली.
कहीं गलियां पानी में डूबी थीं, तो कहीं घरों की चौखट तक पानी पहुंच चुका था. लोगों के लिए कुछ कदम चलना भी मुश्किल था. रास्तों पर पानी का बहाव था और हर कदम संभलकर रखना पड़ रहा था.
लेकिन इन मुश्किलों के बीच कुछ बहनें ऐसी थीं, जिन्हें बाढ़ भी भाई की कलाई तक पहुंचने से नहीं रोक सकी.
हाथ में राखी लिये वे पानी में उतर गयीं. कपड़े संभालते हुए, पैरों को पानी में जमाते हुए और हर कदम पर खुद को बचाते हुए वे आगे बढ़ती रहीं. मंजिल भाई का घर था और दिल में बस एक ही इच्छा थी, इस बार भी भाई की कलाई पर राखी बंधनी चाहिए.
रास्ता डूबा था, लेकिन रिश्ते की राह खुली थी
बाढ़ ने शहर के निचले इलाकों की तस्वीर बदल दी है. जिन रास्तों से आम दिनों में लोग आसानी से गुजरते हैं, वहां अब पानी जमा है.
कई जगह घुटनेभर से ज्यादा पानी है. ऐसे में घर से निकलना भी जोखिम भरा है. लेकिन रक्षाबंधन के दिन बहनों के लिए यह मुश्किल छोटी पड़ गयी.
किसी के हाथ में राखी थी, तो किसी के पास मिठाई. चेहरे पर चिंता थी, लेकिन भाई से मिलने की खुशी भी थी.
पानी में आगे बढ़ती इन बहनों को देखकर आसपास मौजूद लोगों की नजरें भी ठहर गयीं. बाढ़ के बीच यह सिर्फ राखी बांधने का सफर नहीं था, बल्कि रिश्ते के प्रति उस भावनात्मक जुड़ाव की तस्वीर थी, जो मुश्किल हालात में और गहरा दिखाई देता है.
मालती देवी ने कहा- भाई की कलाई सूनी कैसे छोड़ देती
मालती देवी के लिए इस बार राखी का त्योहार आसान नहीं था. बाढ़ के कारण घर से बाहर निकलते ही पानी रास्ते में था.
उन्हें यह भी डर था कि पानी कितना गहरा है और उसे पार करना कितना सुरक्षित होगा. लेकिन मन में भाई की कलाई पर राखी बांधने की इच्छा थी.
मालती देवी ने कहा कि मुश्किल तो बहुत थी, लेकिन भाई की कलाई सूनी छोड़कर लौटने का मन नहीं माना.
वह पानी पार कर भाई के घर पहुंचीं. रास्ते की थकान चेहरे पर साफ दिख रही थी. लेकिन जैसे ही उन्होंने भाई की कलाई पर राखी बांधी, सारी परेशानी जैसे पीछे छूट गयी.
उस पल उनके लिए बाढ़, पानी और रास्ते की मुश्किल से ज्यादा महत्वपूर्ण भाई की कलाई थी.
संगीता बोलीं- रास्ता पानी ने रोका था, रिश्ता नहीं
संगीता के लिए भी इस बार रक्षाबंधन यादगार बन गया.
उन्होंने बताया कि घर से निकलते ही सामने पानी था. रास्ता पहचानना भी मुश्किल हो रहा था. सामान्य दिनों में जिस दूरी को आसानी से तय किया जा सकता था, वही दूरी इस बार चुनौती बन गयी थी.
लेकिन मन में एक ही बात थी कि भाई के पास जाना है.
संगीता ने कहा कि रास्ता पानी ने जरूर रोक दिया था, लेकिन भाई के प्रति प्यार को नहीं रोक सका.
पानी पार कर जब वह भाई के पास पहुंचीं और राखी बांधी, तो उनके लिए त्योहार की खुशी पूरी हो गयी.
बाढ़ ने जिंदगी मुश्किल की, राखी ने उम्मीद दी
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई घरों में पानी पहुंच गया है. रास्ते डूबने से आवागमन प्रभावित है.
परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी और सुरक्षित जगह पर रहने की चिंता है. घर में रखा सामान बचाना भी चुनौती बना हुआ है.
इन्हीं मुश्किलों के बीच रक्षाबंधन लोगों के लिए भावनाओं का एक छोटा-सा सहारा लेकर आया.
बाढ़ ने लोगों के घरों को घेरा, रास्तों को डुबोया और रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बनाया. लेकिन इसी पानी के बीच बहनें भाइयों तक पहुंचीं.
किसी ने पानी पार किया, किसी ने कीचड़ भरा रास्ता तय किया और किसी ने लंबी दूरी तय कर भाई की कलाई पर राखी बांधी.
Bhagalpur Flood Raksha Bandhan: राखी का धागा छोटा था, हौसला बहुत बड़ा
राखी देखने में महज एक छोटा-सा धागा है. लेकिन शुक्रवार को भागलपुर में इसी धागे तक पहुंचने के लिए बहनों ने जो रास्ता तय किया, वह अपने आप में बड़ी कहानी बन गया.
घुटनों तक पानी, डूबे हुए रास्ते और बाढ़ का डर भी उनके कदम नहीं रोक सका.
भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद शायद उनके लिए वह सफर सार्थक हो गया था.
यह दृश्य बाढ़ के बीच रिश्तों की एक अलग तस्वीर पेश कर रहा था. पानी घरों को घेर सकता है, रास्तों को डुबो सकता है, लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना सकता है. लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की उस डोर को रोकना आसान नहीं है, जिसे भावनाएं जोड़ती हैं.
इस रक्षाबंधन भागलपुर में बहनों ने सिर्फ भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि मुश्किल कितनी भी बड़ी हो, अपने रिश्तों तक पहुंचने का हौसला उससे बड़ा हो सकता है.
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