गंगा के उफान से भागलपुर बेहाल, घरों में घुसा पानी तो तीन जगहों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर बाढ़ पीड़ित

Updated:
विज्ञापन

भागलपुर में गंगा का उफान, घरों में घुसा पानी

भागलपुर में गंगा के उफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. निचले इलाकों में घरों तक पानी पहुंच गया है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है. प्रशासन के लिए राहत व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन गई है.

विज्ञापन

Bhagalpur Ganga Flood: भागलपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ तटीय और निचले इलाकों में संकट गहराता जा रहा है. कहीं घरों के अंदर पानी पहुंच गया है, तो कहीं सड़क और रास्ते डूबने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है, जिन्हें घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी है.

आपके शहर में

विज्ञापन

भागलपुर के साहेबगंज, मोहनपुर, नरगा, महाशय ड्योढ़ी, चंपानगर, लालूचक और विश्वविद्यालय क्षेत्र समेत गंगा किनारे के कई इलाकों में बाढ़ का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. पानी बढ़ने के साथ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी थमने लगी है.

घर में रखा सामान बचाने से लेकर बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखने तक की चुनौती परिवारों के सामने है. कई लोग जरूरी सामान को घर के ऊंचे हिस्सों में रखकर किसी तरह टिके हुए हैं, जबकि कई परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में घर से बाहर निकल चुके हैं.

घर तक पहुंचा पानी, बाहर निकलना भी हुआ मुश्किल

निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद सबसे बड़ी परेशानी आवागमन की है. कई जगह रास्तों पर पानी जमा हो गया है. ऐसे में लोगों के लिए बाजार, अस्पताल या दूसरी जरूरी जगहों तक पहुंचना कठिन हो गया है.

पानी बढ़ने के साथ दूषित पानी और संक्रमण से होने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है. बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को लेकर परिवारों की चिंता ज्यादा है.

जिन घरों में पानी प्रवेश कर चुका है, वहां खाना बनाने और राशन रखने की जगह तक प्रभावित हो रही है. घर छोड़ने वाले परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी और सुरक्षित रहने की जगह का संकट खड़ा हो गया है.

बाढ़ ने स्कूलों की राह भी रोकी

गंगा के बढ़ते पानी का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. कई जगह स्कूल परिसर और वहां तक पहुंचने वाले रास्तों में पानी जमा हो गया है.

इससे बच्चों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है. कुछ स्थानों पर स्कूलों के बंद होने की भी स्थिति सामने आयी है.

बाढ़ का पानी सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. इसका असर शिक्षा, रोजगार, बाजार और लोगों की सामान्य दिनचर्या पर भी पड़ रहा है.

तीन जगहों पर बाढ़ पीड़ितों ने बनाया अपना ठिकाना

घर छोड़ने को मजबूर परिवारों ने फिलहाल टीएमबीयू के टिल्हा कोठी, महाशय ड्योढ़ी और सीटीएस चर्च के आसपास शरण ली है. ये स्थान अब बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी ठिकाने बन गये हैं.

लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी उनकी परेशानी खत्म नहीं हुई है.

टिल्हा कोठी में मौजूद बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उन्हें खाने-पीने और बिजली की सुविधा नहीं मिल रही है. उनका कहना है कि रात में अंधेरे के बीच रहना पड़ता है.

बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानी सिर्फ अंधेरे तक सीमित नहीं है. पीड़ितों के मुताबिक रात में जंगली जीवों के आने का खतरा भी बना रहता है. ऐसे माहौल में बच्चों के साथ रात गुजारना उनके लिए सबसे बड़ी चिंता है.

घर बचाएं या परिवार, लोगों के सामने बड़ा सवाल

बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखकर संकट की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. जिन लोगों के घरों में पानी पहुंच गया है, उनके सामने दो विकल्प हैं. या तो घर में रहकर पानी घटने का इंतजार करें या फिर बच्चों और जरूरी सामान के साथ किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं.

लेकिन सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद भोजन, पीने का पानी, रोशनी और रात गुजारने की व्यवस्था नहीं हो तो विस्थापन की परेशानी और बढ़ जाती है.

खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ऐसी परिस्थितियां ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं. पानी बढ़ने के साथ प्रभावित परिवारों की संख्या और उनकी जरूरतों पर लगातार नजर रखना जरूरी हो गया है.

प्रशासन के सामने अब राहत व्यवस्था की बड़ी चुनौती

गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने सिर्फ बाढ़ प्रभावित इलाकों की निगरानी ही नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे लोगों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती भी है.

टिल्हा कोठी, महाशय ड्योढ़ी और सीटीएस चर्च में शरण लिये लोगों की शिकायतों के मुताबिक फिलहाल भोजन, पेयजल और बिजली की व्यवस्था को लेकर परेशानी है. ऐसे में राहत शिविर या अस्थायी ठिकानों पर रहने वाले परिवारों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए.

साथ ही प्रभावित इलाकों में साफ पेयजल, भोजन, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है.

Bhagalpur Ganga Flood: जलस्तर बढ़ा तो और बिगड़ सकती है स्थिति

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर है. यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो निचले इलाकों में रहने वाले और परिवार प्रभावित हो सकते हैं.

ऐसे में प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी, शरणस्थलों पर पर्याप्त भोजन-पानी, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधा तथा बच्चों की सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.

भागलपुर में बाढ़ का पानी अब सिर्फ नदी के किनारे का संकट नहीं रह गया है. यह उन परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का संकट बन चुका है, जिनके लिए अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित जगह पर रात गुजारना ही सबसे बड़ी मजबूरी बन गयी है.

Also Read: मल्लिका शेरावत को तेज प्रताप ने कहा- हॉट एंड सेक्सी लग रही हैं, एक्ट्रेस बोलीं- बिहार की सारी लड़कियां आप पर लट्टू हो जाएंगी

Also Read: प्रभात खबर की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: नेपाल में बना 150 किमी का 'डेथ कॉरिडोर', त्रिशूली नदी में हर ओर तैर रहे शव


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन